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नेहा कक्कड़ जन्मदिन विशेष: ऋषिकेश की गलियों से ग्लोबल स्टार बनने तक का संघर्षपूर्ण सफर

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 11:00 am
नेहा कक्कड़ जन्मदिन विशेष: ऋषिकेश की गलियों से ग्लोबल स्टार बनने तक का संघर्षपूर्ण सफर

बॉलीवुड की 'सेल्फी क्वीन' नेहा कक्कड़ के जन्मदिन पर जानिए उनके संघर्ष की कहानी, कैसे जागरणों में गाकर उन्होंने परिवार का साथ दिया।

भारतीय संगीत जगत की सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली गायिकाओं में से एक, नेहा कक्कड़ आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। 6 जून 1988 को उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक बेहद साधारण परिवार में जन्मी नेहा की सफलता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। आज भले ही वे करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हों और सोशल मीडिया पर उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग हो, लेकिन उनके जीवन की शुरुआत अभावों और कड़े संघर्ष के बीच हुई थी। नेहा अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनकी बड़ी बहन सोनू कक्कड़ और भाई टोनी कक्कड़ भी आज संगीत उद्योग का जाना-माना नाम हैं। उनके पिता ऋषिकेश में एक कॉलेज के बाहर समोसे बेचकर परिवार का गुजारा करते थे। आर्थिक स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि परिवार के पास बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। संगीत के प्रति रुझान होने के बावजूद, औपचारिक प्रशिक्षण के लिए संसाधन नहीं थे, लेकिन नेहा के भीतर के कलाकार को परिस्थितियों ने और मजबूत किया। संघर्ष के शुरुआती दिनों में नेहा ने अपनी बहन सोनू के साथ मिलकर स्थानीय माता के जागरणों और भजनों में गाना शुरू किया। महज चार साल की उम्र से ही उन्होंने धार्मिक आयोजनों में प्रस्तुति देनी शुरू कर दी थी। ये जगराते न केवल उनके रियाज का जरिया बने, बल्कि परिवार की आर्थिक मदद का मुख्य स्रोत भी थे। ऋषिकेश की तंग गलियों से निकलकर दिल्ली और फिर मुंबई तक का सफर उनके अटूट साहस का प्रमाण है। साल 2006 में नेहा कक्कड़ ने रियलिटी शो 'इंडियन आइडल' के दूसरे सीजन में हिस्सा लिया। हालांकि वह शो की विजेता नहीं बन सकीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने 'नेहा द रॉकस्टार' नाम से अपना एक म्यूजिक एल्बम निकाला और धीरे-धीरे बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने लगीं। फिल्म 'कॉकटेल' के गाने 'सेकंड हैंड जवानी' ने उन्हें पहचान दिलाई, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे उसी शो 'इंडियन आइडल' की जज के रूप में नजर आती हैं, जहां कभी वे एक प्रतियोगी के रूप में खड़ी थीं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के बीच भी नेहा कक्कड़ की लोकप्रियता अद्वितीय है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में उनके कॉन्सर्ट्स अक्सर हाउसफुल रहते हैं। वहां बसे प्रवासी भारतीयों के लिए नेहा कक्कड़ केवल एक सिंगर नहीं, बल्कि 'सेल्फ-मेड' सफलता का प्रतीक हैं। उनके गाने न केवल शादियों और पार्टियों की जान होते हैं, बल्कि उनकी संघर्ष गाथा विदेशों में संघर्ष कर रहे भारतीयों को भी प्रेरित करती है। नेहा की कहानी हमें सिखाती है कि यदि प्रतिभा और दृढ़ संकल्प हो, तो किस्मत की लकीरों को बदला जा सकता है।
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