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NCRB रिपोर्ट: भारत में शादीशुदा पुरुषों की आत्महत्या के मामलों में उछाल, विवाहेतर संबंध बने बड़ी वजह
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 04:01 pm

NCRB की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में शादीशुदा पुरुषों की आत्महत्या के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है, जिसमें पारिवारिक समस्याएं और विवाहेतर संबंध मुख्य कारण बनकर उभरे हैं।
भारत में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों ने समाज में पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य और वैवाहिक स्थिरता पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में आत्महत्या करने वाले पुरुषों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जिनमें शादीशुदा पुरुषों का प्रतिशत सबसे अधिक है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पारिवारिक तनाव और विवाहेतर संबंध (extra-marital affairs) इन दुखद घटनाओं के पीछे के प्रमुख कारणों में से एक बनकर उभरे हैं।
NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में विवाहित पुरुषों द्वारा आत्महत्या के मामलों में जो उछाल आया है, वह सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दबाव की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुष अक्सर अपनी भावनात्मक समस्याओं को साझा करने में संकोच करते हैं, जिससे मानसिक तनाव चरम पर पहुंच जाता है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि केवल आर्थिक तंगी ही नहीं, बल्कि रिश्तों में आती दरार और आपसी विश्वास की कमी भी जानलेवा साबित हो रही है।
आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि आत्महत्या करने वाले कुल पुरुषों में से एक बड़ा हिस्सा शादीशुदा था। विवाहेतर संबंधों के कारण उत्पन्न होने वाले विवादों ने कई घरों को उजाड़ दिया है। समाजशास्त्रियों का कहना है कि डिजिटल युग में बदलती जीवनशैली और रिश्तों के प्रति बदलते नजरिए ने भी जटिलताएं बढ़ाई हैं। इसके अलावा, कानूनी पेचीदगियां और सामाजिक प्रतिष्ठा खोने का डर भी पुरुषों को इस आत्मघाती कदम की ओर धकेलता है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में भी यह रिपोर्ट प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय में भी वैवाहिक कलह और अलगाव के मामले बढ़े हैं। प्रवासन का दबाव, सांस्कृतिक अंतर और समर्थन तंत्र (support system) की कमी अक्सर मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में काम करने वाले मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि प्रवासियों के लिए रिश्तों में आने वाली कड़वाहट और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है क्योंकि वे अपने मूल सामाजिक परिवेश से दूर होते हैं।
इस संकट से निपटने के लिए विशेषज्ञ मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और 'बियॉन्ड ब्लू' (Beyond Blue) जैसी संस्थाओं की मदद लेने की सलाह देते हैं। भारत और विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए यह जरूरी है कि वे भावनात्मक संकट के समय पेशेवर परामर्श का सहारा लें। एनसीआरबी की यह रिपोर्ट न केवल एक चेतावनी है, बल्कि समाज के लिए एक कॉल-टू-एक्शन भी है कि पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक स्थिरता को गंभीरता से लिया जाए।
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