राजनीति
'मिसिंग लिंक' श्रेय विवाद: अमोल मिटकरी ने अजीत पवार की अनदेखी पर देवेंद्र फडणवीस पर साधा निशाना
ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 04:31 pm
महाराष्ट्र की महायुति सरकार में श्रेय लेने की होड़ तेज हो गई है। राकांपा विधायक अमोल मिटकरी ने 'मिसिंग लिंक' परियोजना में अजीत पवार की अनदेखी पर देवेंद्र फडणवीस के प्रति नाराजगी जताई है।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर श्रेय लेने की राजनीति गरमा गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) अमोल मिटकरी ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विवाद की जड़ मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर बन रही महत्वाकांक्षी 'मिसिंग लिंक' (Missing Link) परियोजना है। मिटकरी ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है कि फडणवीस ने इस परियोजना का श्रेय लेते समय उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के योगदान का उल्लेख तक नहीं किया।
हाल ही में देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया के माध्यम से 'मिसिंग लिंक' परियोजना की प्रगति के बारे में जानकारी साझा की थी। अपने संदेश में, फडणवीस ने इस बुनियादी ढांचा पहल के लिए खुद को और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को श्रेय दिया। फडणवीस के इस रुख ने महायुति गठबंधन के भीतर की दरार को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। मिटकरी ने याद दिलाया कि अजीत पवार न केवल सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं, बल्कि वित्त मंत्रालय का प्रभार भी उन्हीं के पास है, जिसने इस प्रोजेक्ट के लिए धन आवंटित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अमोल मिटकरी ने न केवल आपत्ति जताई, बल्कि एक बड़ी मांग भी रख दी। उन्होंने आग्रह किया कि 'मिसिंग लिंक' परियोजना का नाम दिवंगत अजीत पवार के नाम पर रखा जाना चाहिए। हालांकि अजीत पवार अभी जीवित और सक्रिय राजनीति में हैं, मिटकरी का आशय संभवतः उनके राजनीतिक कद को सम्मानित करने से था। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा करना पवार की कड़ी मेहनत और फडणवीस के साथ उनकी पुरानी दोस्ती के प्रति एक उचित सम्मान होगा। मिटकरी का कहना है कि गठबंधन सरकार में सभी सहयोगियों के योगदान को मान्यता दी जानी चाहिए, अन्यथा कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाता है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से महाराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम काफी रुचि का विषय है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई अक्सर मुंबई-पुणे मार्ग का उपयोग करते हैं और इस क्षेत्र के विकास को बारीकी से देखते हैं। गठबंधन के भीतर इस तरह की खींचतान भारत में राजनीतिक स्थिरता और भविष्य के निवेश को लेकर प्रवासियों की चिंताओं को बढ़ाती है। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में क्रेडिट की लड़ाई अक्सर प्रशासनिक देरी का कारण बनती है, जिससे एनआरआई (NRI) निवेश भी प्रभावित हो सकता है।
'मिसिंग लिंक' परियोजना का उद्देश्य खपोली और कुश्गांव के बीच की दूरी को कम करना है, जिससे मुंबई और पुणे के बीच यात्रा के समय में लगभग 20-25 मिनट की कटौती होगी। यह तकनीकी रूप से एक जटिल प्रोजेक्ट है जिसमें दुनिया की कुछ सबसे चौड़ी सुरंगें शामिल हैं। फिलहाल, फडणवीस या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मिटकरी के बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले महायुति के घटक दलों के बीच श्रेय की यह जंग और तेज होने वाली है।
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