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इंडो-पैसिफिक से गल्फ तक: भारत की नई कूटनीतिक बिसात, मोदी और जयशंकर के दौरों के मायने

ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 05:31 pm
इंडो-पैसिफिक से गल्फ तक: भारत की नई कूटनीतिक बिसात, मोदी और जयशंकर के दौरों के मायने

जुलाई का महीना भारतीय विदेश नीति के लिए निर्णायक साबित हो रहा है, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर वैश्विक कूटनीति के जरिए भारत के सामरिक मानचित्र को नया आकार दे रहे हैं।

जुलाई 2024 का महीना भारतीय विदेश नीति के इतिहास में एक अत्यंत व्यस्त और महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में उभर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस समय दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि भारत अपनी वैश्विक भूमिका को और अधिक मुखर बनाने के लिए तैयार है। जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री मोदी यूरेशिया और इंडो-पैसिफिक के संतुलन को साध रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्री जयशंकर खाड़ी देशों (गल्फ) में भारत की पैठ को मजबूत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की हालिया रूस और ऑस्ट्रिया की यात्राओं ने पश्चिमी देशों और रूस के बीच संतुलन बनाए रखने की भारत की क्षमता को एक बार फिर साबित किया है। रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करना और साथ ही ऑस्ट्रिया जैसे यूरोपीय देशों के साथ तकनीक और व्यापार पर चर्चा करना भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' को दर्शाता है। ऑस्ट्रेलिया जैसे इंडो-पैसिफिक साझेदारों के लिए, भारत का यह रुख महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि नई दिल्ली किसी एक गुट में शामिल होने के बजाय एक स्वतंत्र ध्रुव के रूप में उभर रही है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक है। दूसरी ओर, विदेश मंत्री एस. जयशंकर का खाड़ी देशों का दौरा भारत की 'एक्सटेंडेड नेबरहुड' नीति का हिस्सा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर जैसे देशों के साथ भारत के संबंध अब केवल श्रम और ऊर्जा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब ये रणनीतिक साझेदारी, निवेश और सुरक्षा सहयोग में बदल चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह कूटनीति विशेष महत्व रखती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती साख और मजबूत द्विपक्षीय संबंध प्रवासियों की सुरक्षा और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इन यात्राओं का मुख्य उद्देश्य केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि ठोस परिणाम हासिल करना है। समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और सप्लाई चेन का विविधीकरण ऐसे मुद्दे हैं जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया के साझा हितों को जोड़ते हैं। भारत का नया रणनीतिक मैप यह स्पष्ट करता है कि वह अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी वैश्विक शक्ति है जो पूर्व और पश्चिम के बीच सेतु का कार्य कर सकती है। आगामी महीनों में इन कूटनीतिक प्रयासों का असर व्यापार समझौतों और रक्षा सौदों के रूप में देखने को मिल सकता है।
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