ऑस्ट्रेलिया
नैंसी गुथरी केस: पूर्व एफबीआई एजेंट ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल, संदिग्ध की फोटो जारी न करने की आलोचना की
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:06 am

नैंसी गुथरी की गुमशुदगी के पांच महीने बाद, एक पूर्व एफबीआई एजेंट ने जांच में पारदर्शिता की कमी और संदिग्ध की फोटो जारी न करने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ऑस्ट्रेलिया में नैंसी गुथरी की गुमशुदगी के रहस्यमयी मामले में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगली उठानी शुरू कर दी है। एक पूर्व एफबीआई एजेंट ने जांचकर्ताओं द्वारा बरती जा रही गोपनीयता की कड़ी आलोचना की है। उनका मुख्य सवाल यह है कि आखिर क्यों पुलिस अब तक उस संदिग्ध व्यक्ति की उन्नत (एन्हांस्ड) फोटो जारी नहीं कर पाई है, जो इस मामले की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
नैंसी गुथरी के लापता होने को अब लगभग पांच महीने का समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं। पूर्व एफबीआई एजेंट के अनुसार, जांच की इस लंबी अवधि में संदिग्ध की तस्वीरों को सार्वजनिक न करना न केवल जांच की गति को धीमा करता है, बल्कि जनता की मदद लेने के अवसर को भी खत्म कर देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक तकनीक के युग में धुंधली तस्वीरों को साफ करना और उनकी स्पष्ट छवियां बनाना काफी आसान हो गया है, जिसे 'डिजिटल एन्हांसमेंट' कहा जाता है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह मामला सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिंता का विषय बना हुआ है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी समुदायों, विशेषकर भारतीय मूल के लोगों के बीच इस तरह के मामलों को लेकर अक्सर असुरक्षा की भावना पैदा होती है। ऐसे में कानून प्रवर्तन एजेंसियों से पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद की जाती है। पूर्व एजेंट का मानना है कि यदि संदिग्ध की फोटो समय रहते जारी कर दी जाती, तो शायद जनता से कोई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता था, जो अब तक पुलिस की नजरों से ओझल रहा हो।
जांचकर्ताओं की ओर से इस मामले में चुप्पी साधी गई है, जिसे 'रणनीतिक चुप्पी' बताया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का तर्क है कि पांच महीने का समय किसी भी सक्रिय जांच के लिए काफी लंबा होता है। इस देरी से साक्ष्य नष्ट होने और गवाहों की याददाश्त धुंधली होने का खतरा बढ़ जाता है। पूर्व एजेंट ने यह भी सुझाव दिया कि पुलिस को बाहरी डिजिटल विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए ताकि संदिग्ध की पहचान सुनिश्चित की जा सके।
इस मामले ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पुलिस की कार्यक्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न राज्यों में रह रहे भारतीय समुदाय के लोग अक्सर सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर संवेदनशील रहते हैं। नैंसी गुथरी का मामला यह याद दिलाता है कि अपराध की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस और जनता के बीच सूचनाओं का साझा होना कितना अनिवार्य है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पुलिस विशेषज्ञों की इस सलाह पर गौर करती है और नई जानकारियों के साथ सामने आती है।
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