राजनीति
नदिया: ऐतिहासिक राघवेश्वर शिव मंदिर के अस्तित्व पर मंडराया संकट, विरासत संरक्षण की उठी मांग
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 12:37 am

पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में स्थित प्राचीन राघवेश्वर शिव मंदिर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों ने इसके संरक्षण की मांग तेज कर दी है।
पश्चिम बंगाल का नदिया जिला अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। हालांकि, इसी जिले के दिग्नगर में स्थित ऐतिहासिक राघवेश्वर शिव मंदिर वर्तमान में उपेक्षा और बदहाली का शिकार है। 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में निर्मित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि बंगाल की पारंपरिक वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना भी है। हाल के दिनों में मंदिर की जर्जर स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों और विरासत संरक्षण कार्यकर्ताओं ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।
इतिहासकारों के अनुसार, इस भव्य मंदिर का निर्माण नदिया के राजा राघव राय ने 1669 के आसपास कराया था। यह मंदिर अपनी विशिष्ट 'आठ-चाला' (आठ छतों वाली) शैली के लिए जाना जाता है, जो मध्यकालीन बंगाल की वास्तुकला की एक प्रमुख विशेषता है। मंदिर की दीवारों पर की गई सूक्ष्म नक्काशी और ईंटों का काम उस समय के कुशल कारीगरों की कलात्मकता को दर्शाता है। दुर्भाग्यवश, समय की मार और उचित रख-रखाव के अभाव में इस धरोहर का अस्तित्व अब खतरे में नजर आ रहा है। मंदिर के ऊपरी हिस्सों में दरारें आ गई हैं और दीवारों पर काई और जंगली वनस्पतियां उग आई हैं, जो इसकी संरचनात्मक अखंडता को नुकसान पहुंचा रही हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से बंगाल मूल के प्रवासियों के लिए यह समाचार चिंता का विषय है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले कई प्रवासी भारतीय अक्सर अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस करने के लिए इन ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करते हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के सदस्यों का मानना है कि इस तरह की विरासत न केवल भारत की संपत्ति है, बल्कि यह पूरी मानवता की सांस्कृतिक धरोहर है। उनका तर्क है कि यदि इन स्थलों को संरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी समृद्ध विरासत से वंचित रह जाएंगी।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर के आसपास अतिक्रमण और कचरे का जमाव भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। हालांकि यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) या राज्य पुरातत्व विभाग की सीधी देखरेख में पूरी तरह से सुरक्षित नहीं लग रहा है, स्थानीय लोग अब सरकार से इसे 'संरक्षित स्मारक' घोषित करने की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तत्काल मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया गया, तो बारिश के मौसम में मंदिर को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के माध्यम से एक अभियान भी शुरू किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिल रहा है। मांग की जा रही है कि पर्यटन विभाग को इस स्थल को विकसित करना चाहिए ताकि न केवल इसका संरक्षण हो सके, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिले। नदिया का यह राघवेश्वर मंदिर केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं है, बल्कि यह बंगाल के गौरवशाली इतिहास का गवाह है, जिसे बचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
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