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मेट्रो-9 विवाद: भाजपा विधायक की कंपनी को 24 करोड़ रुपये देगी मीरा-भायंदर मनपा, टीडीआर के बजाय नकद भुगतान पर उठे सवाल

ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 07:26 am
मेट्रो-9 विवाद: भाजपा विधायक की कंपनी को 24 करोड़ रुपये देगी मीरा-भायंदर मनपा, टीडीआर के बजाय नकद भुगतान पर उठे सवाल

मीरा-भायंदर मनपा ने मेट्रो-9 के काशीगांव स्टेशन की सीढ़ियों के लिए भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता की कंपनी को 24 करोड़ रुपये मुआवजा देने का निर्णय लिया है।

मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में बुनियादी ढांचे के विकास के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मीरा-भायंदर मेट्रो लाइन-9 के अंतर्गत काशीगांव मेट्रो स्टेशन की सीढ़ियों के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि के अधिग्रहण को लेकर मीरा-भायंदर नगर निगम (MBMC) ने एक बड़ा वित्तीय निर्णय लिया है। लंबे समय से चले आ रहे विवाद और विरोध के बाद, मनपा ने अब भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता की पारिवारिक कंपनी 'सेवन इलेवन' के स्वामित्व वाली भूमि के बदले 24 करोड़ रुपये का नकद मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि आमतौर पर नगर निकाय भूमि अधिग्रहण के बदले 'ट्रांसफर करने योग्य विकास अधिकार' (TDR) या 'अतिरिक्त फ्लोर स्पेस इंडेक्स' (FSI) प्रदान करते हैं। हालांकि, इस विशिष्ट मामले में, प्रशासन ने नकद भुगतान का रास्ता चुना है, जिससे स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है। सूत्रों के अनुसार, काशीगांव स्टेशन के लिए सीढ़ियों का निर्माण करना मेट्रो परियोजना के लिए अनिवार्य है, लेकिन संबंधित भूमि निजी स्वामित्व में होने के कारण काम रुका हुआ था। आलोचकों का तर्क है कि मीरा-भायंदर मनपा वर्तमान में वित्तीय संकट से जूझ रही है और बुनियादी सुविधाओं के लिए धन की कमी का सामना कर रही है। ऐसे में एक रसूखदार राजनीतिक परिवार की कंपनी को भारी-भरकम नकद मुआवजा देना नगर निगम की प्राथमिकता पर सवाल उठाता है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि विधायक की कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है, जबकि टीडीआर के माध्यम से इस लागत को बचाया जा सकता था। इस परियोजना का महत्व मुंबई और उसके आसपास के उपनगरों में रहने वाले लाखों प्रवासियों के लिए भी है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे जो मुंबई और ठाणे क्षेत्र से आते हैं, इस मेट्रो लाइन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह लाइन मीरा रोड और भायंदर जैसे क्षेत्रों को मुंबई के मुख्य नेटवर्क से जोड़कर यात्रा के समय को काफी कम कर देगी। हालांकि, भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े ये विवाद परियोजना की समयसीमा और पारदर्शिता पर चिंता पैदा करते हैं। विधायक नरेंद्र मेहता के समर्थकों का कहना है कि यह भूमि व्यावसायिक रूप से मूल्यवान है और विकास के लिए इसका समर्पण कंपनी के लिए घाटे का सौदा है, इसलिए उचित मुआवजे की मांग की गई थी। दूसरी ओर, विपक्षी दल इस सौदे को 'राजनीतिक उपहार' करार दे रहे हैं। फिलहाल, मनपा ने फाइल को आगे बढ़ा दिया है और यदि यह भुगतान पूरा होता है, तो यह मुंबई के उपनगरीय विकास में सबसे महंगे भूमि अधिग्रहणों में से एक होगा।
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