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लीबिया के तट पर प्रवासियों की नाव पलटी: 51 लोगों की मौत या लापता होने की आशंका

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 11:08 am
लीबिया के तट पर प्रवासियों की नाव पलटी: 51 लोगों की मौत या लापता होने की आशंका

लीबिया के पूर्वी तट पर प्रवासियों को ले जा रही एक नाव डूबने से 51 लोगों की मौत हो गई है या वे लापता हैं। इस हादसे में केवल 10 लोग सुरक्षित बच पाए हैं।

भूमध्य सागर एक बार फिर मानवीय त्रासदी का गवाह बना है। लीबिया के पूर्वी तट पर प्रवासियों से भरी एक नाव के पलट जाने से कम से कम 51 लोगों के मारे जाने या लापता होने की दुखद खबर सामने आई है। प्रवासियों की आवाजाही पर नजर रखने वाले एक निगरानी समूह के अनुसार, यह हादसा पिछले सप्ताह 12 जून को हुआ था, जब दर्जनों लोग बेहतर भविष्य की तलाश में यूरोप पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, नाव में सवार लोगों में से केवल 10 लोग ही इस भीषण हादसे में जीवित बच पाए हैं। लीबिया का यह समुद्री क्षेत्र लंबे समय से उन प्रवासियों के लिए एक प्रमुख प्रस्थान बिंदु रहा है, जो अफ्रीका और एशिया के विभिन्न हिस्सों से युद्ध, गरीबी और अस्थिरता से बचने के लिए यूरोप की ओर पलायन करते हैं। निगरानी समूह ने बताया कि समुद्र की लहरों और नाव की जर्जर स्थिति ने इस दुर्घटना को और अधिक घातक बना दिया। यह घटना उस खतरनाक 'सेंट्रल मेडिटेरेनियन रूट' की याद दिलाती है, जिसे दुनिया के सबसे घातक प्रवासी मार्गों में से एक माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने बार-बार चेतावनी दी है कि पर्याप्त कानूनी रास्तों के अभाव में लोग मानव तस्करों के जाल में फंसकर इन असुरक्षित नावों का सहारा लेते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, दक्षिण एशियाई देशों, जिनमें भारत और पाकिस्तान भी शामिल हैं, के नागरिकों द्वारा भी इसी तरह के खतरनाक रास्तों का उपयोग करने के मामले बढ़े हैं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटना वैश्विक प्रवास संकट की गंभीरता को रेखांकित करती है। जहां एक ओर ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश अपनी आव्रजन नीतियों को सख्त बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आर्थिक अवसरों की कमी और विस्थापन की मजबूरी लोगों को इस तरह के जानलेवा जोखिम उठाने पर मजबूर कर रही है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय अक्सर ऐसे मुद्दों पर मानवीय दृष्टिकोण की वकालत करता रहा है, ताकि अवैध मानव तस्करी को रोका जा सके और सुरक्षित आव्रजन को बढ़ावा मिले। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस त्रासदी के बाद लीबिया और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग की आलोचना की है। उनका तर्क है कि प्रवासियों को रोकने की नीतियों के कारण बचाव अभियान प्रभावित होते हैं, जिससे हताहतों की संख्या में वृद्धि होती है। इस ताजा हादसे ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर एक बार फिर दबाव डाल दिया है कि वे केवल सीमाओं को सुरक्षित करने पर ध्यान न दें, बल्कि उन मूल कारणों को भी संबोधित करें जो लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर करते हैं। मृतकों और लापता लोगों की पहचान अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन माना जा रहा है कि इनमें विभिन्न अफ्रीकी और मध्य पूर्वी देशों के नागरिक शामिल थे। स्थानीय अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां अब बचे हुए लोगों को सहायता प्रदान करने और समुद्र में खोज अभियान चलाने में जुटी हैं।
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