राजनीति
महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल: रामदास अठावले ने शरद पवार को दिया एनडीए में शामिल होने का न्योता
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 08:31 pm

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शरद पवार को एनडीए में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से सरगर्मियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के प्रमुख रामदास अठावले ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने का खुला निमंत्रण दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब विपक्षी खेमे में कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी के बीच संभावित विलय की खबरें चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
मुंबई में मीडिया से बात करते हुए अठावले ने कहा कि शरद पवार जैसे कद्दावर नेता के लिए कांग्रेस में अपनी पार्टी का विलय करने के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा बनना अधिक सम्मानजनक होगा। अठावले ने तर्क दिया कि पवार ने वर्षों तक अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखी है और कांग्रेस के साथ जाने के बजाय उन्हें विकास के एजेंडे पर एनडीए का साथ देना चाहिए।
यह राजनीतिक प्रस्ताव तब आया है जब महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर गठबंधन समीकरणों में खींचतान चल रही है। पिछले कुछ हफ्तों से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि महा विकास अघाड़ी (MVA) के भीतर एकता को मजबूत करने के लिए एनसीपी (एसपी) का कांग्रेस में विलय हो सकता है। हालांकि, पवार गुट के नेताओं ने आधिकारिक तौर पर इन खबरों को खारिज किया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अठावले का यह बयान विपक्षी एकता में सेंध लगाने और मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा करने की एक रणनीति हो सकती है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले महाराष्ट्र मूल के प्रवासी (प्रवासी भारतीय) अक्सर राज्य की राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं। महाराष्ट्र की अस्थिर राजनीतिक स्थिति का असर अक्सर राज्य के विकास और निवेश परियोजनाओं पर पड़ता है, जिससे विदेश में रहने वाले भारतीयों की चिंताएं जुड़ी होती हैं। अठावले का यह कदम भाजपा नीत गठबंधन की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें वे शरद पवार को कमजोर करने या उन्हें अपने पाले में लाकर विपक्षी गठबंधन को अस्थिर करना चाहते हैं।
फिलहाल शरद पवार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जानकारों का कहना है कि पवार अपनी मौजूदा रणनीति पर कायम रहेंगे, विशेष रूप से तब जब लोकसभा चुनावों में उनके गुट ने अच्छा प्रदर्शन किया है। अठावले का प्रस्ताव राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों पर पड़ना तय है।
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