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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव: भाजपा की रणनीति से बढ़ा रोमांच, कांग्रेस ने शुरू की विधायकों की घेराबंदी

ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 07:00 pm
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव: भाजपा की रणनीति से बढ़ा रोमांच, कांग्रेस ने शुरू की विधायकों की घेराबंदी

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा की संभावित घेराबंदी को देखते हुए कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट करना शुरू कर दिया है।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। आगामी 18 जून को होने वाले मतदान के लिए भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। विशेष रूप से तीसरी सीट को लेकर पैदा हुए सस्पेंस ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। भाजपा द्वारा तरुण चुघ और रजनीश जैसे दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारने की चर्चाओं के बीच, कांग्रेस अब अपने खेमे को बचाने की जद्दोजहद में जुट गई है। वर्तमान संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी की स्थिति मजबूत नजर आ रही है, लेकिन रणनीतिक स्तर पर पार्टी ने अभी अपने पूरे पत्ते नहीं खोले हैं। भाजपा की इस चुप्पी ने विपक्षी दल कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा आलाकमान तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस के भीतर सेंध लगाने की योजना पर विचार कर रहा है। यदि भाजपा अतिरिक्त उम्मीदवार उतारती है, तो चुनाव का मुकाबला बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। इधर कांग्रेस पार्टी ने किसी भी तरह की 'क्रॉस वोटिंग' या दलबदल की आशंका को देखते हुए अपने विधायकों की घेराबंदी शुरू कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विधायकों से संपर्क साधते हुए उन्हें एकजुट रहने के निर्देश दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में हुए राजनीतिक उलटफेर को देखते हुए कांग्रेस कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहती। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सूत्रों का कहना है कि विधायकों को एक साथ रखने के लिए प्रशिक्षण शिविर और बैठकों का दौर जल्द ही शुरू किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव का यह मुकाबला केवल सीटों का नहीं, बल्कि साख की लड़ाई भी है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह चुनाव चर्चा का विषय बना हुआ है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय, जो अपने गृह राज्य की राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं, इस घटनाक्रम को भारत की लोकतांत्रिक शुचिता के नजरिए से देख रहे हैं। प्रवासी भारतीयों के बीच अक्सर यह चर्चा रहती है कि क्या संख्या बल और दलबदल की राजनीति विकास के मुद्दों पर भारी पड़ रही है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद 18 जून को मतदान होगा। भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों के प्रोफाइल से साफ है कि पार्टी संगठनात्मक मजबूती को प्राथमिकता दे रही है। वहीं, कांग्रेस का पूरा ध्यान अपने आधार को बचाए रखने पर है। अगले कुछ दिन मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए निर्णायक साबित होंगे, क्योंकि दोनों ही दल निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों के समर्थन को जुटाने के लिए भी पर्दे के पीछे सक्रिय हो गए हैं।
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