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मध्य प्रदेश: जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों की नियुक्तियों में देरी, स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक नहीं किया फैसला
ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 05:31 am

मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने स्नातकोत्तर चिकित्सा छात्रों के लिए अनिवार्य जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम (DRP) के तहत नियुक्तियों को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया है।
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्नातकोत्तर (पीजी) चिकित्सा छात्रों के लिए अनिवार्य 'जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम' (DRP) के तहत नियुक्तियों की सूची जारी करने में हो रही देरी ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों और छात्रों के बीच अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा अनिवार्य किए गए इस कार्यक्रम के तहत, सभी पीजी मेडिकल छात्रों को अपने पाठ्यक्रम के दौरान तीन महीने के लिए जिला और उप-जिला अस्पतालों में तैनात किया जाना आवश्यक है।
मध्य प्रदेश में इस प्रक्रिया में हो रही देरी न केवल शैक्षणिक कैलेंडर को प्रभावित कर रही है, बल्कि जिला स्तर के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को भी बरकरार रखे हुए है। डीआरपी का प्राथमिक उद्देश्य युवा डॉक्टरों को ग्रामीण और जिला स्तर पर वास्तविक नैदानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुभव प्रदान करना है। इसके साथ ही, यह उन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का एक प्रयास है जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।
नियमों के अनुसार, पीजी मेडिकल छात्रों को उनके तीसरे या चौथे सेमेस्टर के दौरान तीन महीने की रोटेशनल पोस्टिंग पर भेजा जाना चाहिए। मध्य प्रदेश में वर्तमान बैच के लिए स्वास्थ्य विभाग को रिक्तियों और अस्पतालों का विवरण बहुत पहले ही अंतिम रूप दे देना चाहिए था, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण यह मामला अभी भी लंबित है। चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय की कमी भी इस देरी का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की देरी से डॉक्टरों की ट्रेनिंग पर बुरा असर पड़ता है। जब डॉक्टर अंतिम समय में तैनात किए जाते हैं, तो उनके शोध कार्य (Thesis) और शैक्षणिक परीक्षाओं की तैयारी में बाधा आती है। इसके अलावा, जिला अस्पतालों को जो अतिरिक्त जनशक्ति मिलनी चाहिए थी, वह समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए, विशेषकर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रवासियों के लिए, भारत की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली में आने वाली ये बाधाएं गहरी चिंता का विषय हैं। ऑस्ट्रेलिया में भी ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है, जहाँ 'बॉन्डेड मेडिकल प्रोग्राम' जैसे प्रावधानों के माध्यम से डॉक्टरों को दूरदराज के क्षेत्रों में भेजा जाता है। भारत में डीआरपी जैसी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि भविष्य के विशेषज्ञ डॉक्टर जमीनी स्तर की चुनौतियों से अवगत हों। मध्य प्रदेश में इस देरी को जल्द सुलझाने की मांग की जा रही है ताकि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के बीच संतुलन बना रहे।
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