राजनीति
लखनऊ: फायर एनओसी के नोटिस पर व्यापारियों का प्रदर्शन, पुराने बाजारों में नियमों को लेकर छिड़ी रार
ICN24 Newsroom 3 अग॰ 2026, 08:37 am

लखनऊ के व्यापारियों ने फायर एनओसी के नोटिस का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि पुराने बाजारों की संकरी गलियों और पुरानी इमारतों में नए सुरक्षा नियमों को लागू करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के व्यापारिक हलकों में इन दिनों भारी तनाव का माहौल है। हाल ही में अग्नि शमन विभाग (फायर ब्रिगेड) द्वारा शहर के विभिन्न प्रतिष्ठानों को जारी किए गए फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के नोटिस के खिलाफ व्यापारियों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। व्यापारियों का तर्क है कि प्रशासन द्वारा थोपे जा रहे ये मानक व्यावहारिक नहीं हैं और इससे छोटे एवं मध्यम स्तर के व्यवसायों पर संकट आ सकता है।
राजधानी के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों जैसे अमीनाबाद, हजरतगंज, चौक और आलमबाग के व्यापार मंडलों ने इस मुद्दे पर एक आपात बैठक बुलाई। व्यापारियों का कहना है कि लखनऊ के पुराने बाजारों में अधिकांश इमारतें दशकों, या कहें तो सदियों पुरानी हैं। इन संकरी गलियों में स्थित दुकानों और शोरूमों में उन मानकों को पूरा करना असंभव है जो आधुनिक बहुमंजिला इमारतों के लिए बनाए गए हैं। लखनऊ व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे सुरक्षा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन नियमों में लचीलापन और वास्तविकता का ध्यान रखा जाना चाहिए।
विवाद की मुख्य जड़ वह नोटिस है जिसमें पर्याप्त निकास द्वार, बड़े वॉटर टैंक और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने की शर्त रखी गई है। व्यापारियों का कहना है कि पुराने बाजारों में जगह की भारी कमी है। यदि वे इन मानकों को पूरा करने के लिए निर्माण कार्य करते हैं, तो उन्हें अपनी दुकानों का एक बड़ा हिस्सा तोड़ना पड़ेगा, जिससे उनके व्यापार का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। इसके अलावा, कई व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि इन नोटिसों की आड़ में विभाग के कुछ अधिकारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं और उत्पीड़न कर रहे हैं।
प्रशासनिक पक्ष की बात करें तो, हाल के वर्षों में भारत के विभिन्न शहरों में हुई बड़ी आगजनी की घटनाओं के बाद सरकार सुरक्षा मानकों को लेकर काफी सख्त हो गई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता, क्योंकि आग लगने की स्थिति में घनी आबादी वाले इन बाजारों में जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। लखनऊ के फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वे केवल कानून का पालन कर रहे हैं ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और व्यापारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रशासन ने संवाद का रास्ता नहीं अपनाया और नोटिस वापस नहीं लिए, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। व्यापारियों ने मांग की है कि पुरानी इमारतों के लिए एक अलग 'श्रेणी' बनाई जाए और वहां उपलब्ध संसाधनों के आधार पर सुरक्षा मानक तय किए जाएं।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर वे जो लखनऊ या उत्तर प्रदेश से संबंध रखते हैं, इस खबर को गंभीरता से देख रहे हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में कड़े 'बिल्डिंग कोड' और 'फायर सेफ्टी' नियमों के तहत व्यापार करने वाले भारतीय प्रवासियों का मानना है कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन भारत जैसे घने शहरी ढांचे में इसे लागू करने के लिए सरकार को बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए व्यापारियों की मदद भी करनी चाहिए। लखनऊ के व्यापारिक माहौल पर पड़ने वाला यह असर सीधे तौर पर वहां के आर्थिक विकास और निवेश को प्रभावित कर सकता है।
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