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तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के विलय पर लोकसभा अध्यक्ष का फैसला सोमवार को संभव

ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 07:35 am
तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के विलय पर लोकसभा अध्यक्ष का फैसला सोमवार को संभव

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय के प्रस्ताव पर महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं।

नई दिल्ली: भारतीय संसदीय राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तहत, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सोमवार सुबह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों के एक कम चर्चित राजनीतिक दल ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय के प्रस्ताव पर अपना फैसला सुना सकते हैं। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को जानकारी दी कि अध्यक्ष के कार्यालय ने इस संबंध में सभी कानूनी पहलुओं की समीक्षा पूरी कर ली है और सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने के आसपास इस पर औपचारिक घोषणा की जा सकती है। यह मामला उस समय गरमाया जब टीएमसी के इन 20 सांसदों ने सामूहिक रूप से अपनी मूल पार्टी से अलग होने और एनसीपीआई के साथ जुड़ने की इच्छा जताई। भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे दल-बदल विरोधी कानून के रूप में जाना जाता है, के अनुसार किसी भी दल के विधायी समूह में विभाजन को तभी मान्यता दी जाती है जब कम से कम दो-तिहाई सदस्य अलग होकर किसी अन्य दल में विलय करें। यदि अध्यक्ष इस विलय को मंजूरी देते हैं, तो ये सांसद अपनी सदस्यता गंवाए बिना एक नए गुट के रूप में कार्य कर सकेंगे। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष बिरला ने शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसदों के संबंध में भी इसी तरह की याचिकाओं पर विचार-विमर्श किया था। हालांकि, टीएमसी के बागी गुट का मामला संख्या बल और राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल की राजनीति और केंद्र में सत्ता के संतुलन पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत की संसदीय स्थिरता और विधायी प्रक्रियाएं हमेशा से रुचि का विषय रही हैं। प्रवासी भारतीय विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के राजनीतिक घटनाक्रम न केवल भारत के आंतरिक लोकतंत्र को प्रभावित करते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की राजनीतिक छवि और विदेशी निवेश के माहौल पर भी प्रभाव डालते हैं। विशेष रूप से मेलबर्न और सिडनी में सक्रिय भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर गहरी दिलचस्पी देखी जाती है। बागी सांसदों का तर्क है कि वे पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की कमी और नेतृत्व के कुछ फैसलों से असंतुष्ट हैं। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने इन सांसदों पर अवसरवाद का आरोप लगाया है और लोकसभा अध्यक्ष से उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग की है। सोमवार को आने वाला फैसला यह तय करेगा कि क्या ये 20 सांसद स्वतंत्र रूप से अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू कर पाएंगे या उन्हें उपचुनावों का सामना करना होगा। फिलहाल, सबकी नजरें संसद भवन की ओर टिकी हैं, जहां सोमवार सुबह इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।
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