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'फ्रेंड्स' के दिग्गज निर्देशक जेम्स बरोज का 85 वर्ष की आयु में निधन; भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रशंसकों के लिए क्यों है यह एक निजी क्षति?
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 10:57 pm
मशहूर सिटकॉम 'फ्रेंड्स' के निर्देशक जेम्स बरोज का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। मैथ्यू पेरी के बाद, यह खबर प्रशंसकों के लिए एक और गहरा सदमा लेकर आई है।
टेलीविजन इतिहास के सबसे प्रभावशाली निर्देशकों में से एक, जेम्स बरोज का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। बरोज को दुनिया भर में मशहूर सिटकॉम 'फ्रेंड्स' (F.R.I.E.N.D.S) को एक सांस्कृतिक पहचान देने के लिए जाना जाता है। उनके निधन की खबर ने मनोरंजन जगत में शोक की लहर पैदा कर दी है, खासकर उन प्रशंसकों के बीच जो अभी भी पिछले साल मैथ्यू पेरी के आकस्मिक निधन के दुख से उबर रहे हैं।
जेम्स बरोज केवल एक निर्देशक नहीं थे, बल्कि वे उस विजन के रचयिता थे जिसने 'फ्रेंड्स' के शुरुआती दिनों में इसके किरदारों और कहानी के ढांचे को तैयार किया था। उन्होंने शो के पायलट एपिसोड सहित कई महत्वपूर्ण कड़ियों का निर्देशन किया। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, 'फ्रेंड्स' केवल एक टीवी शो नहीं, बल्कि एक यादों का पिटारा है। 90 के दशक और 2000 की शुरुआत में भारत से ऑस्ट्रेलिया आने वाले कई प्रवासियों के लिए, यह शो अक्सर अंग्रेजी सीखने और पश्चिमी संस्कृति को समझने का एक अनौपचारिक माध्यम बना।
जेम्स बरोज और मैथ्यू पेरी के बीच एक गहरा पेशेवर और व्यक्तिगत रिश्ता था। पेरी ने अक्सर अपनी यादों में बरोज का जिक्र किया था, जिन्होंने उन्हें कॉमेडी की बारीकियां और टाइमिंग सिखाई थी। प्रशंसकों के लिए, बरोज का जाना वैसा ही महसूस हो रहा है जैसे उन्होंने अपने बचपन के एक हिस्से को खो दिया हो। जिस तरह मैथ्यू पेरी के 'चांडलर बिंग' के किरदार ने हमें हंसाया, उसे पर्दे पर उतारने के पीछे बरोज का ही हाथ था।
बरोज का करियर केवल 'फ्रेंड्स' तक ही सीमित नहीं था। उन्होंने 'चीयर्स' (Cheers), 'टैक्सी' (Taxi), और 'विल एंड ग्रेस' (Will & Grace) जैसे कालजयी शो के जरिए सिटकॉम की विधा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्हें उनके काम के लिए 10 एमी पुरस्कार मिले और उन्होंने टीवी निर्देशन के क्षेत्र में एक ऐसा मानक स्थापित किया, जिसका पालन आज के निर्देशक भी करते हैं।
सिडनी और मेलबर्न जैसे ऑस्ट्रेलियाई शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। कई प्रशंसकों का मानना है कि जेम्स बरोज ने एक ऐसी दुनिया बनाई थी जहां दोस्ती और रिश्तों को सबसे ऊपर रखा गया था, जो भारतीय मूल्यों के भी काफी करीब है। उनके जाने से टेलीविजन के एक स्वर्ण युग का अंत हो गया है, लेकिन उनके द्वारा निर्देशित शो आने वाली पीढ़ियों को भी हंसते रहने की प्रेरणा देते रहेंगे।
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