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BCI अध्यक्ष के खिलाफ 'लीगल कॉकरोच' का विरोध प्रदर्शन कल, नालसार विवाद के बाद इस्तीफे की मांग तेज

ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 04:37 am
BCI अध्यक्ष के खिलाफ 'लीगल कॉकरोच' का विरोध प्रदर्शन कल, नालसार विवाद के बाद इस्तीफे की मांग तेज

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ कल सुबह 10 बजे प्रदर्शन होगा। 'लीगल कॉकरोच' कहे जाने वाले वकीलों और कार्यकर्ताओं ने उनके इस्तीफे की मांग की है।

भारत की कानूनी बिरादरी में मचे घमासान के बीच, खुद को 'लीगल कॉकरोच' (कानूनी तिलचट्टे) कहने वाले वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह विरोध प्रदर्शन कल सुबह 10 बजे आयोजित किया जाएगा, जिसमें मिश्रा के तत्काल इस्तीफे की मांग की जाएगी। यह घटनाक्रम नालसार (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में हुए हालिया विवाद के कुछ दिनों बाद सामने आया है, जहां बीसीआई अध्यक्ष की टिप्पणियों ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया था। सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने इस विरोध प्रदर्शन को अपना पूरा समर्थन देने की घोषणा की है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए कहा, "ऐसा लगता है कि 'लीगल कॉकरोच' एकजुट हो गए हैं और कल सुबह 10 बजे बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे और उनके इस्तीफे की मांग करेंगे।" यह विरोध प्रदर्शन न केवल एक व्यक्ति के खिलाफ है, बल्कि भारतीय कानूनी तंत्र के भीतर बढ़ती कथित तानाशाही और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमलों के खिलाफ एक सामूहिक आवाज के रूप में देखा जा रहा है। विवाद की जड़ बीसीआई अध्यक्ष द्वारा इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्दों में छिपी है। दरअसल, मनन कुमार मिश्रा ने कथित तौर पर उन वकीलों और कार्यकर्ताओं के लिए 'लीगल कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल किया था जो व्यवस्था की आलोचना करते हैं। इस अपमानजनक टिप्पणी को कार्यकर्ताओं ने एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया और अब वे इसी नाम के तहत संगठित होकर विरोध कर रहे हैं। नालसार विश्वविद्यालय में दिए गए उनके संबोधन को छात्र समुदाय और कानूनी विशेषज्ञों ने 'अलोकतांत्रिक' और 'अकादमिक स्वतंत्रता के विरुद्ध' बताया था। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय कानूनी पेशेवरों और प्रवासियों के लिए यह मुद्दा विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही कॉमन लॉ परंपराओं को साझा करते हैं, जहां कानूनी संस्थानों की स्वायत्तता और वकीलों की सुरक्षा लोकतंत्र के स्तंभ माने जाते हैं। सिडनी और मेलबर्न में स्थित भारतीय कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बार काउंसिल जैसे नियामक निकाय के प्रमुख द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा का स्तर पूरे पेशे की गरिमा को प्रभावित करता है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया का कार्य वकीलों के हितों की रक्षा करना और कानूनी शिक्षा के मानकों को बनाए रखना है, न कि उन लोगों को डराना जो सवाल पूछते हैं। कल होने वाला यह विरोध प्रदर्शन यह तय करेगा कि आने वाले दिनों में बीसीआई और देश के कानूनी कार्यकर्ताओं के बीच संबंध किस दिशा में मुड़ेंगे। फिलहाल, राजधानी और अन्य कानूनी केंद्रों पर सुरक्षा और चौकसी बढ़ा दी गई है ताकि स्थिति शांतिपूर्ण बनी रहे।
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