राजनीति
लेबनानी सेना का दक्षिणी गांव से पीछे हटना: इजरायली सैनिकों की बढ़ती हलचल के बीच तनाव गहराया
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 05:01 am
इजरायली सेना की बढ़ती सक्रियता के बीच लेबनानी सेना कफर तिबनित गांव से पीछे हट गई है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है।
पश्चिम एशिया में गहराते सुरक्षा संकट के बीच, लेबनानी सेना ने दक्षिणी लेबनान के प्रमुख गांव कफर तिबनित (Kfar Tebnit) से अपने पैर पीछे खींच लिए हैं। यह निर्णय इजरायली सैनिकों की सीमा के करीब बढ़ती सक्रियता और संभावित जमीनी संघर्ष को देखते हुए लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, इजरायली रक्षा बलों (IDF) द्वारा क्षेत्र में निकासी की चेतावनियां जारी करने के बाद लेबनानी सैन्य टुकड़ियों ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए अपनी चौकियों को खाली कर दिया है।
लेबनान की राष्ट्रीय सेना, जो तकनीकी रूप से हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं है, अक्सर ऐसे सीमावर्ती क्षेत्रों से हट जाती है जहां इजरायली जमीनी आक्रमण का खतरा होता है। कफर तिबनित से सैनिकों का पीछे हटना इस बात का संकेत है कि इजरायली सेना अब लेबनानी सीमा के भीतर अपनी पैठ और गहरी कर रही है। सीमाई इलाकों में रहने वाले नागरिकों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए जा चुके हैं, जिससे क्षेत्र में मानवीय संकट बढ़ गया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम चिंता का विषय बना हुआ है। ऑस्ट्रेलिया में लेबनानी और भारतीय प्रवासियों की एक बड़ी आबादी है, और पश्चिम एशिया में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया की संघीय सरकार ने पहले ही लेबनान में फंसे अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, जिनके व्यापारिक हित या मित्र इस क्षेत्र से जुड़े हैं, इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं।
इजरायल का कहना है कि उसका अभियान उत्तरी इजरायल के निवासियों को उनके घरों में सुरक्षित वापस लाने के लिए है, जो हिजबुल्लाह के रॉकेट हमलों के कारण विस्थापित हुए हैं। वहीं, लेबनान सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें संयुक्त राष्ट्र भी शामिल है, लगातार शांति की अपील कर रहा है ताकि पूर्ण स्तर के युद्ध को टाला जा सके।
फिलहाल, कफर तिबनित और उसके आसपास के इलाकों में हवाई हमलों और आर्टिलरी फायरिंग की खबरें आ रही हैं। लेबनानी सेना का पीछे हटना यह स्पष्ट करता है कि आने वाले दिनों में जमीनी संघर्ष और अधिक तीव्र हो सकता है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस युद्ध की आग को ठंडा कर पाएंगे या यह संघर्ष एक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगा।
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