राजनीति
कूकटपल्ली भूमि विवाद: हाइड्रा ने तेलंगाना हाईकोर्ट में कहा, 'हमने किसी अदालती आदेश का उल्लंघन नहीं किया'
ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 07:30 am

हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया एवं संपत्ति संरक्षण एजेंसी (HYDRAA) ने हाईकोर्ट को सूचित किया है कि उसने कूकटपल्ली में भूमि से संबंधित किसी भी अदालती आदेश का उल्लंघन नहीं किया है।
हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया और संपत्ति संरक्षण एजेंसी (HYDRAA) ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के समक्ष एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया है। एजेंसी ने अदालत को सूचित किया कि उसने कूकटपल्ली क्षेत्र में सर्वे संख्या 1003 से 1006 के अंतर्गत आने वाली भूमि के संबंध में किसी भी न्यायिक आदेश का उल्लंघन नहीं किया है और न ही वह इस विवादित भूमि के मामलों में हस्तक्षेप कर रही है। यह सबमिशन उन आरोपों के जवाब में आया है जिनमें दावा किया गया था कि एजेंसी ने यथास्थिति बनाए रखने के अदालती निर्देशों की अवहेलना की है।
न्यायालय में दायर अपने हलफनामे में, हाइड्रा (HYDRAA) ने स्पष्ट किया कि उनकी कार्रवाई केवल अवैध निर्माणों और जल निकायों के संरक्षण तक सीमित है। एजेंसी ने उन दावों को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि वे निजी स्वामित्व वाली संपत्तियों या उन क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं जो न्यायिक संरक्षण के अधीन हैं। हाइड्रा ने अदालत से अनुरोध किया है कि उनके खिलाफ दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया जाए, क्योंकि उनकी ओर से कानून का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।
यह मामला हैदराबाद के कूकटपल्ली इलाके में स्थित बेशकीमती जमीनों से जुड़ा है, जहाँ पिछले कुछ समय से अतिक्रमण और अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। भारत के प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों में से एक होने के नाते, हैदराबाद की इन जमीनी विवादों पर विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की भी गहरी नजर है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे तेलंगाना मूल के कई भारतीयों ने इन क्षेत्रों में निवेश किया हुआ है, और हाइड्रा की सक्रियता ने संपत्ति की सुरक्षा को लेकर एक व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
तेलंगाना सरकार ने झीलों और सरकारी जमीनों को बचाने के उद्देश्य से हाइड्रा का गठन किया था। हालांकि, इसकी कार्यप्रणाली को लेकर कई बार कानूनी चुनौतियां सामने आई हैं। हालिया सुनवाई में, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि हाइड्रा के अधिकारी उन जमीनों पर भी कार्रवाई कर रहे हैं जिनके लिए न्यायालय ने पहले ही सुरक्षा प्रदान की थी। इसके जवाब में, एजेंसी के अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि वे पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहे हैं और केवल जनहित में ही कदम उठा रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय के दृष्टिकोण से देखें तो हैदराबाद का 'रियल एस्टेट रेगुलेशन' और हाइड्रा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय, जो अक्सर अपनी जन्मभूमि पर निवेश करते हैं, इन कानूनी कार्यवाहियों को संपत्ति के अधिकारों की स्पष्टता के रूप में देख रहे हैं। यदि एजेंसी यह साबित कर पाती है कि वह केवल नियमों के दायरे में रहकर काम कर रही है, तो इससे भविष्य के निवेशकों के बीच कानूनी भरोसे की बहाली हो सकती है। फिलहाल, उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई तक एजेंसी के जवाब को रिकॉर्ड पर ले लिया है।
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