राजनीति
केरल हाईकोर्ट ने केसी वेणुगोपाल के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की, माकपा नेता ए.एम. आरिफ को लगा बड़ा झटका
ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 05:56 pm
केरल उच्च न्यायालय ने अलप्पुझा सीट से कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल की जीत के खिलाफ माकपा नेता ए.एम. आरिफ की याचिका को कानूनी आधार की कमी के कारण खारिज कर दिया है।
केरल उच्च न्यायालय ने 2024 के लोकसभा चुनावों के परिणामों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद ए.एम. आरिफ द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अलप्पुझा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के दिग्गज नेता केसी वेणुगोपाल के निर्वाचन को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति जी. गिरीश की एकल पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि याचिका में ऐसा कोई ठोस कानूनी आधार मौजूद नहीं है, जिसके चलते चुनाव परिणाम को अमान्य घोषित किया जा सके।
अदालत ने याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करते हुए कहा कि यह मामला जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत 'कॉज ऑफ एक्शन' (कार्यवाही का कारण) पेश करने में विफल रहा है। जस्टिस गिरीश ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि चुनाव याचिका दायर करने के लिए कानून द्वारा निर्धारित कड़े मापदंडों का पालन किया जाना अनिवार्य है। माकपा नेता आरिफ ने वेणुगोपाल की जीत पर सवाल उठाते हुए कुछ प्रक्रियात्मक खामियों और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था, लेकिन अदालत ने इन्हें कानूनी रूप से अपर्याप्त माना।
2024 के आम चुनावों में अलप्पुझा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा रहा था। कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस सीट से जीत दर्ज कर कांग्रेस का परचम लहराया था। उल्लेखनीय है कि 2019 के चुनावों में अलप्पुझा केरल की एकमात्र ऐसी सीट थी जहां से वामपंथी गठबंधन (LDF) की ओर से ए.एम. आरिफ ने जीत हासिल की थी। ऐसे में 2024 में इस सीट को वापस पाना कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल था। वेणुगोपाल की जीत ने न केवल केरल में कांग्रेस की स्थिति मजबूत की, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उनके कद को और ऊंचा किया।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से मलयाली प्रवासियों के लिए यह समाचार महत्वपूर्ण है। केरल की राजनीति में होने वाले ये बदलाव प्रवासी समुदाय के बीच गहरी दिलचस्पी का विषय होते हैं, क्योंकि अलप्पुझा जैसे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग ऑस्ट्रेलिया में शिक्षा और रोजगार के लिए बसे हुए हैं। केरल की राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति प्रवासी भारतीयों का लगाव जगजाहिर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद केसी वेणुगोपाल की संसदीय सदस्यता पर मंडरा रहा कानूनी खतरा फिलहाल टल गया है। हालांकि, याचिकाकर्ता के पास इस फैसले को उच्च पीठ या सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का विकल्प मौजूद है, लेकिन हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद इसकी संभावनाओं पर संशय बना हुआ है। फिलहाल, अलप्पुझा की जनता के जनादेश को अदालत ने कानूनी रूप से बरकरार रखा है।
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