राजनीति
'कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है': पीओके में इस्लामाबाद के खिलाफ उग्र प्रदर्शन, गहराया मानवीय संकट
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 03:56 am

पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में बढ़ती महंगाई और खाद्यान्न की कमी के बीच प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसमें 22 लोगों की मौत की खबर है।
पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, जहां स्थानीय नागरिकों ने इस्लामाबाद के शासन के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है। हाल ही में रावलकोट में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि 'कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है'। यह बयान उस समय आया है जब क्षेत्र में बढ़ती महंगाई, आटे की कमी और बिजली के भारी बिलों के कारण आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व प्रतिबंधित जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस्लामाबाद प्रशासन जानबूझकर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित कर रहा है। विरोध प्रदर्शन के प्रमुख नेता सरदार अमान खान ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि यदि यह 'नाकेबंदी' और दमन जारी रहा, तो पीओके के निवासी अपनी जरूरतों के लिए 'अन्य रास्तों' की तलाश करेंगे। यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तान की संप्रभुता को चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 22 लोगों की जान जा चुकी है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है और धारा 144 लागू कर दी है, लेकिन इसके बावजूद जनता का गुस्सा कम नहीं हो रहा है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और मीरपुर जैसे प्रमुख शहरों में बाजार पूरी तरह बंद हैं और परिवहन सेवाएं ठप पड़ी हैं।
विवाद उस समय और गहरा गया जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रावलकोट और मीरपुर के निवासियों के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें अपमानित कर रही है। नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे लोग जिनकी जड़ें जम्मू-कश्मीर से जुड़ी हैं, इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। सिडनी और मेलबर्न में सक्रिय प्रवासी संगठनों ने पीओके में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की है। विश्लेषकों का मानना है कि यह अशांति न केवल पाकिस्तान के आंतरिक संकट को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। यदि इस्लामाबाद ने तत्काल संवाद और संसाधनों का वितरण सुनिश्चित नहीं किया, तो यह आंदोलन एक बड़े नागरिक विद्रोह का रूप ले सकता है।
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