राजनीति
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिण के लिए मांगी फंड में समानता और सम्मान
ICN24 Newsroom 20 अग॰ 2026, 08:37 pm

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिणी राज्यों के लिए वित्तीय और राजनीतिक समानता की पुरजोर वकालत की है, उन्होंने फंड आवंटन में पारदर्शिता और सम्मान की मांग की।
महाबलीपुरम, तमिलनाडु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने देश के दक्षिणी राज्यों के लिए वित्तीय और राजनीतिक समानता की एक मजबूत अपील की है। 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए, उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण के राज्य जो भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देते हैं, उन्हें केंद्र से मिलने वाले फंड के आवंटन में उचित न्याय, निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में मजबूत आवाज और उचित सम्मान मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस बात पर जोर दिया कि दक्षिणी राज्य, जिनमें कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और कर संग्रह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि करों के हस्तांतरण (Devolution of Taxes) के मामले में इन राज्यों के साथ अक्सर असंतुलन देखा जाता है। शिवकुमार के अनुसार, यह केवल धन की बात नहीं है, बल्कि उस सम्मान और पहचान की भी है जो इन राज्यों को राष्ट्रीय विकास में उनके योगदान के बदले मिलनी चाहिए।
बैठक के दौरान शिवकुमार ने कहा कि केंद्र को सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह मुद्दा उठाया कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और आर्थिक सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, लेकिन अक्सर यही सफलता उनके लिए वित्त आयोग के आवंटन फार्मूले में नुकसान का कारण बन जाती है। उनका तर्क था कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को दंडित करने के बजाय प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से दक्षिण भारतीय प्रवासियों के लिए, यह बहस काफी मायने रखती है। ऑस्ट्रेलिया में एक बड़ी आबादी कर्नाटक और अन्य दक्षिणी राज्यों से आती है, जो भारत के आईटी, स्वास्थ्य सेवा और इंजीनियरिंग क्षेत्रों से जुड़ी है। ये प्रवासी अक्सर अपने गृह राज्यों में बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास पर नजर रखते हैं। भारत में राज्यों के बीच राजकोषीय असंतुलन की चर्चा सीधे तौर पर उन निवेशों और अवसरों को प्रभावित करती है जो यह समुदाय भारत में तलाशता है।
शिवकुमार ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि एक मजबूत दक्षिण ही एक मजबूत भारत का निर्माण कर सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह दक्षिणी राज्यों की विशिष्ट जरूरतों और उनकी चिंताओं को गंभीरता से ले, ताकि देश का विकास संतुलित और समावेशी बना रहे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिवकुमार का यह बयान आने वाले समय में केंद्र-राज्य संबंधों और क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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