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कर्नाटक: आवारा कुत्तों और वृक्ष गणना पर मंत्री की नाराजगी, अधिकारियों से मांगे जवाब
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 06:11 am
कर्नाटक के मंत्री ने आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और वृक्ष गणना में पाई गई खामियों पर प्रशासन को फटकार लगाई है और ठोस समाधान की मांग की है।
कर्नाटक सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने राज्य में नागरिक प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए अधिकारियों से जवाब तलब किया है। मंत्री ने विशेष रूप से दो प्रमुख मुद्दों—आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी और अधूरे वृक्ष गणना (tree census)—पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। एक समीक्षा बैठक के दौरान, मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन बुनियादी नागरिक समस्याओं का समाधान न होना प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।
आवारा कुत्तों के मुद्दे पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य के शहरी क्षेत्रों, विशेषकर बेंगलुरु में, कुत्तों के हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रमों के लिए आवंटित भारी बजट के बावजूद स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो रहा है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे न केवल नसबंदी के आंकड़ों को स्पष्ट करें, बल्कि एक ऐसा समाधान भी प्रस्तावित करें जिससे नागरिकों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सुझाव दिया कि कुत्तों के टीकाकरण और उनकी आबादी की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और डेटा ट्रैकिंग का उपयोग किया जाना चाहिए।
वहीं, वृक्ष गणना (tree census) के मामले में मंत्री ने पाया कि अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है। विकास परियोजनाओं के नाम पर काटे गए पेड़ों के बदले लगाए गए नए पौधों की उत्तरजीविता दर (survival rate) पर भी संदेह व्यक्त किया गया। मंत्री ने कहा कि वृक्ष गणना में मौजूद खामियां यह दर्शाती हैं कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता की कमी है। उन्होंने आदेश दिया कि एक पारदर्शी और डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाए जिससे यह पता चल सके कि किस क्षेत्र में कितने पेड़ हैं और उनकी स्थिति क्या है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर काफी प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख शहरों जैसे सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन में पालतू जानवरों और आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए अत्यंत सख्त नियम हैं। वहां स्थानीय काउंसिल (Local Councils) हर पालतू कुत्ते के लिए 'माइक्रोचिप' और पंजीकरण अनिवार्य करती हैं, जिससे पशु नियंत्रण सुव्यवस्थित रहता है। भारत में भी इस तरह के कड़े नियामक ढांचे की मांग समय-समय पर प्रवासियों द्वारा उठाई जाती रही है।
इसी प्रकार, ऑस्ट्रेलिया में 'अर्बन फॉरेस्ट स्ट्रेटेजी' के तहत हर एक पेड़ की मैपिंग की जाती है। मेलबर्न जैसे शहरों में तो प्रत्येक पेड़ को एक विशिष्ट आईडी दी गई है। कर्नाटक के मंत्री का यह कदम दर्शाता है कि भारतीय शहरों को भी अब वैश्विक मानकों के अनुरूप अपनी नागरिक सुविधाओं और पर्यावरणीय डेटा को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है। मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि अगली बैठक तक संतोषजनक उत्तर और समाधान नहीं मिले, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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