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लेबनान संघर्ष पर ईरान का सख्त रुख, अमेरिका से वादे निभाने की मांग
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 06:25 am

ईरान ने लेबनान में शांति के लिए अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने की चेतावनी दी है और दोहा वार्ता को केवल तकनीकी प्रक्रिया बताया है।
तेहरान ने लेबनान में जारी सैन्य संघर्ष को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका से अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का आह्वान किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, लेबनान में शांति की बहाली तभी संभव है जब अमेरिका और उसके सहयोगी क्षेत्र में युद्धविराम सुनिश्चित करने के लिए किए गए अपने वादों पर अमल करें। ईरान का मानना है कि पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए सैन्य कार्रवाइयों का तत्काल रुकना अनिवार्य है।
दोहा में चल रही बातचीत के संदर्भ में, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह इन वार्ताओं को किसी बड़े राजनीतिक समाधान के बजाय केवल एक 'तकनीकी प्रक्रिया' के रूप में देखता है। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि जब तक जमीनी स्तर पर सैन्य आक्रामकता कम नहीं होती, तब तक कूटनीतिक वार्ताओं का कोई ठोस परिणाम निकलना मुश्किल है। तेहरान ने यह भी संकेत दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा का ढांचा तभी मजबूत हो सकता है जब बाहरी हस्तक्षेप कम हो और संबंधित पक्ष ईमानदारी से समझौतों का पालन करें।
इस संघर्ष का प्रभाव केवल लेबनान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति पर भी पड़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह चिंता का विषय है। गौरतलब है कि खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं और काम करते हैं। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता न केवल वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डालती है, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले व्यापार और ईंधन की कीमतों को भी प्रभावित करती है।
सिडनी और मेलबर्न जैसे प्रमुख ऑस्ट्रेलियाई शहरों में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। कई परिवारों के रिश्तेदार मध्य पूर्व के विभिन्न देशों में बसे हुए हैं, जिसके कारण वहां की अशांति का सीधा भावनात्मक और आर्थिक प्रभाव ऑस्ट्रेलिया के प्रवासी समुदायों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान में तनाव कम नहीं हुआ, तो यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार यह दोहराया है कि वह लेबनान की संप्रभुता का समर्थन करता है। हालांकि, अमेरिका और उसके सहयोगियों का आरोप है कि ईरान क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करने वाले गुटों को बढ़ावा दे रहा है। इन परस्पर विरोधी दावों के बीच, आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ईरान की ओर से ताजा बयान वॉशिंगटन पर दबाव बनाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है ताकि वह इजरायल और लेबनान के बीच मध्यस्थता में अपनी भूमिका को अधिक सक्रिय और परिणामोन्मुखी बनाए। आगामी दिनों में दोहा की तकनीकी चर्चाओं से निकलने वाले निष्कर्ष यह तय करेंगे कि यह संघर्ष कूटनीति की ओर मुड़ता है या सैन्य गतिरोध और गहरा होता है।
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