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कर्नाटक हाईकोर्ट ने मतदाता सूची संशोधन की अवधि बढ़ाने वाली याचिका बंद की; चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का दिया हवाला

ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 05:36 am
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मतदाता सूची संशोधन की अवधि बढ़ाने वाली याचिका बंद की; चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का दिया हवाला

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन की समय सीमा बढ़ाने की मांग वाली जनहित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि चुनाव आयोग इस पर निर्णय लेने के लिए सक्षम है।

बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उस जनहित याचिका (PIL) को बंद करने का आदेश दिया, जिसमें मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) की अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) एक संवैधानिक संस्था है और वह मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और समय-सीमा से निपटने के लिए सबसे बेहतर स्थिति में है। अदालत ने अपने आदेश में इस बात पर भी जोर दिया कि इसी तरह के सवाल पहले से ही देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं। ऐसी स्थिति में, उच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग के प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझा। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि मौजूदा समय-सीमा अपर्याप्त है और इससे कई पात्र मतदाता सूची से बाहर रह सकते हैं। हालांकि, अदालत ने माना कि चुनावी प्रक्रियाओं का प्रबंधन पूरी तरह से आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और एनआरआई (NRI) समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। भारतीय नागरिकता रखने वाले कई ऑस्ट्रेलियाई निवासी भारत में होने वाले चुनावों में अपना वोट डालने के लिए पंजीकृत होते हैं। मतदाता सूची का गहन संशोधन यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि विदेशों में रह रहे भारतीयों के नाम सूची में बने रहें और उनके डेटा में किसी भी प्रकार की त्रुटि न हो। यदि संशोधन की अवधि सीमित रहती है, तो दूरस्थ क्षेत्रों या विदेशों से प्रक्रिया पूरी करने वाले नागरिकों के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विशेष गहन संशोधन (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाना है। इसमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, नामों को हटाना और पते में बदलाव जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बसे भारतीय समुदाय अक्सर डिजिटल माध्यमों से इन सुधारों की मांग करते रहे हैं। कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल समय-सीमा में बदलाव की संभावना कम है और नागरिकों को निर्धारित समय के भीतर ही अपनी आपत्तियां या सुधार दर्ज कराने होंगे। न्यायालय ने यह भी दोहराया कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का न्यायिक हस्तक्षेप चुनाव की तैयारियों में देरी का कारण बन सकता है। भारत में लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची की शुद्धता अनिवार्य है, और इसके लिए आयोग समय-समय पर विशेष अभियान चलाता रहता है। प्रवासी भारतीयों को सलाह दी जाती है कि वे निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल 'NVSP' के माध्यम से अपनी जानकारी नियमित रूप से अपडेट करते रहें, ताकि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर सकें।
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