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कानपुर: जाजमऊ के ऐतिहासिक उर्स में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, तीन लाख जायरीनों ने मांगी अमन की दुआ

ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 09:37 pm
कानपुर: जाजमऊ के ऐतिहासिक उर्स में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, तीन लाख जायरीनों ने मांगी अमन की दुआ

कानपुर के जाजमऊ में दादामियां और मखदूम शाह आला के उर्स में तीन लाख से अधिक अकीदतमंदों ने शिरकत की। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर का जाजमऊ इलाका बुधवार को पूरी तरह से सूफियाना रंग में रंगा नजर आया। अवसर था हजरत दादामियां और हजरत मखदूम शाह आला की मजारों पर आयोजित सालाना उर्स के कुल शरीफ का। इस धार्मिक आयोजन में न केवल कानपुर, बल्कि आसपास के कई जिलों से लगभग तीन लाख से अधिक अकीदतमंदों ने शिरकत की। श्रद्धा और विश्वास के इस संगम में लोगों ने देश की खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआएं मांगी। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह तड़के ही हो गई थी। सुबह 8 बजे दादामियां की मजार पर और सुबह 11 बजे मखदूम शाह आला की दरगाह पर कुल शरीफ की रस्म पूरी अकीदत के साथ अदा की गई। जैसे ही कुल शरीफ का समय करीब आया, पूरा परिसर 'लब्बैक' और सलातो-सलाम की सदाओं से गूंज उठा। अकीदतमंदों ने मजारों पर मखमली चादरें और ताजे फूल पेश किए। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे और पुलिस प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर अपनी नजर बनाए रखी। उर्स के मुख्य दिन से पहले मंगलवार की रात को महफिले-समां का आयोजन किया गया था। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में प्रख्यात कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश किए, जिसने मौजूद जायरीनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मखदूम शाह आला की दरगाह पर मौलाना अशरफी ने विशेष प्रार्थना का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने संबोधन में समाज में शांति, प्रेम और एकता बनाए रखने पर जोर दिया, जो सूफी परंपरा का मूल आधार है। प्रशासन के लिए इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती थी। जाजमऊ और आसपास के क्षेत्रों में यातायात को सुचारु बनाने के लिए विशेष रूट डायवर्जन लागू किए गए थे। कानपुर पुलिस ने भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया था और संवेदनशील बिंदुओं पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी रखी जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार, आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और जायरीनों की सुविधा के लिए पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की भी व्यवस्था की गई थी। भारत की इस समृद्ध सूफी विरासत का महत्व केवल देश तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह गहरी आस्था का केंद्र है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बसे भारतीय मूल के लोग, विशेषकर जो उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं, इन अवसरों पर अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस करते हैं। सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले कई प्रवासी परिवार अक्सर ऐसी आध्यात्मिक यात्राओं के लिए भारत की योजना बनाते हैं, जो गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल पेश करते हैं।
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