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कामिका एकादशी 2024: सावन में भगवान विष्णु की विशेष पूजा का दिन, जानें शुभ मुहूर्त और विधि
ICN24 Newsroom 9 अग॰ 2026, 02:37 pm

सावन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी के रूप में मनाया जाता है। जानें भगवान विष्णु की पूजा विधि और ऑस्ट्रेलिया में इसके शुभ मुहूर्त का महत्व।
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पवित्र तिथि आज, 9 अगस्त को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, लेकिन इस माह में आने वाली एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व है, जो हरि और हर (विष्णु और शिव) के मिलन का प्रतीक मानी जाती है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह पर्व अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिसबेन जैसे प्रमुख शहरों में रहने वाले श्रद्धालु भारतीय समय के अनुसार पंचांग की गणना करते हुए अपनी पूजा का समय निर्धारित करते हैं। स्थानीय मंदिरों में भी इस अवसर पर विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया जाता है। चूंकि ऑस्ट्रेलिया में इस समय शीत ऋतु का प्रभाव है, भक्त सुबह जल्दी स्नान कर संकल्प लेते हैं और भगवान विष्णु के श्रीधर रूप की आराधना करते हैं।
पूजा विधि की बात करें तो कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें और भगवान का गंगाजल से अभिषेक करें। इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का निरंतर जाप करना फलदायी होता है। शाम के समय विष्णु चालीसा का पाठ और आरती की जाती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई परिवार इस दिन सामूहिक रूप से ऑनलाइन माध्यमों से जुड़कर कथा का श्रवण भी करते हैं।
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति इस एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करता है, उसे गंगा स्नान के समान पुण्य प्राप्त होता है। पूजा के अंत में आरती और चालीसा का पाठ करना न भूलें। आरती के बोल 'जय जगदीश हरे' के साथ ही विष्णु चालीसा का पाठ भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को शुभ समय पर किया जाना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया में समय के अंतर (Time Zone) को देखते हुए श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मंदिर या विश्वसनीय पंचांग से पारण का सही समय अवश्य जांच लें।
कामिका एकादशी न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि का भी मार्ग है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। भारतीय समुदाय के सदस्य इस अवसर पर चैरिटी संगठनों को दान देकर अपनी परंपराओं का निर्वहन करते हैं। यह व्रत जीवन में सकारात्मकता लाने और परिवार में सामंजस्य बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
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