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कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: गृह मंत्रालय ने नाथू ला और लिपुलेख ला को अस्थायी आव्रजन पोस्ट घोषित किया
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 01:50 am

भारत सरकार ने 2026 की कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सिक्किम और उत्तराखंड के दो प्रमुख सीमा द्वारों को आव्रजन केंद्रों के रूप में मंजूरी दी है।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए सिक्किम के नाथू ला और उत्तराखंड के लिपुलेख ला दर्रे को अस्थायी आव्रजन चेक पोस्ट के रूप में अधिसूचित किया है। यह निर्णय आगामी तीर्थयात्रा सीजन के दौरान यात्रियों की आवाजाही को सुव्यवस्थित करने और सीमा सुरक्षा प्रक्रियाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, पूर्वी सिक्किम जिले में स्थित नाथू ला और उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख ला अब आधिकारिक प्रवेश और निकास बिंदु के रूप में कार्य करेंगे।
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। 2026 की यात्रा के कार्यक्रम के अनुसार, तीर्थयात्री 20 जुलाई से नाथू ला मार्ग के माध्यम से अपनी यात्रा शुरू कर सकेंगे। यह मार्ग विशेष रूप से उन वरिष्ठ नागरिकों और तीर्थयात्रियों के लिए पसंदीदा रहा है जो अपेक्षाकृत कम पैदल चलने वाले रास्तों की तलाश में रहते हैं। लिपुलेख ला दर्रे को भी इसी उद्देश्य के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से होकर जाने वाले पारंपरिक मार्ग को फिर से सक्रिय किया जा सके।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय (Diaspora) के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। प्रतिवर्ष सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों से बड़ी संख्या में ओसीआई (OCI) कार्ड धारक और भारतीय मूल के नागरिक इस आध्यात्मिक यात्रा में भाग लेने के लिए भारत आते हैं। आव्रजन चौकियों के आधिकारिक पदनाम से विदेशी पासपोर्ट धारक भारतीयों के लिए वीजा और आव्रजन संबंधी औपचारिकताएं अब अधिक स्पष्ट और सुलभ हो जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन केंद्रों पर उन्नत तकनीकी सुविधाओं के होने से यात्रियों के प्रतीक्षा समय में कमी आएगी।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और स्थानीय प्रशासन इन दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटे हैं। गृह मंत्रालय की यह अधिसूचना न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति प्रदान करेगी। यात्रा के सुचारू संचालन के लिए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि खराब मौसम या भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
आगामी यात्रा के लिए आवेदन प्रक्रिया और स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देश जल्द ही जारी किए जाने की उम्मीद है। ऑस्ट्रेलिया स्थित यात्रा एजेंटों ने भी इस घोषणा का स्वागत किया है, क्योंकि इससे उन्हें भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर यात्रा पैकेज और लॉजिस्टिक्स तैयार करने में मदद मिलेगी। जो लोग 2026 में यात्रा की योजना बना रहे हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अपने यात्रा दस्तावेजों और शारीरिक फिटनेस पर अभी से ध्यान देना शुरू कर दें, क्योंकि यह यात्रा अत्यधिक ऊंचाई और चुनौतीपूर्ण मौसम की स्थिति में होती है।
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