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झारखंड में रोजगार आंदोलन: कांग्रेस और हेमंत सोरेन सरकार के लिए क्यों बढ़ रही हैं मुश्किलें?

ICN24 Newsroom 5 अग॰ 2026, 01:37 pm
झारखंड में रोजगार आंदोलन: कांग्रेस और हेमंत सोरेन सरकार के लिए क्यों बढ़ रही हैं मुश्किलें?

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक को लेकर बढ़ता जनाक्रोश आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस-झामुमो गठबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

झारखंड की राजनीति में इस समय युवाओं का आक्रोश उबाल पर है। राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में देरी को लेकर छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। यह विरोध प्रदर्शन न केवल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सरकार के लिए, बल्कि उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के लिए भी एक गंभीर सिरदर्द बन गया है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए, यह मुद्दा राज्य की सत्ता संरचना को हिलाने की क्षमता रखता है। विरोध का मुख्य केंद्र झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित परीक्षाएं हैं। हाल ही में सीजीएल (CGL) परीक्षा के पेपर लीक होने की खबरों ने छात्रों के धैर्य का बांध तोड़ दिया। इसके अलावा, उत्पाद सिपाही भर्ती के दौरान शारीरिक परीक्षण में कई युवाओं की दुर्भाग्यपूर्ण मौत ने सरकार की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष, विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), इन घटनाओं को लेकर सरकार पर हमलावर है और इसे 'युवा विरोधी' करार दे रही है। कांग्रेस के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है। पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर 'बेरोजगारी' को केंद्र सरकार के खिलाफ अपना सबसे बड़ा हथियार बनाती रही है। राहुल गांधी अपनी न्याय यात्राओं में बार-बार युवाओं को रोजगार और 'पेपर लीक मुक्त भारत' का भरोसा देते रहे हैं। ऐसे में, यदि कांग्रेस शासित या गठबंधन वाली सरकार में ही पेपर लीक की घटनाएं होती हैं, तो इससे पार्टी की नैतिक साख पर आंच आती है। राज्य कांग्रेस के भीतर भी इस बात को लेकर सुगबुगाहट है कि यदि समय रहते युवाओं के गुस्से को शांत नहीं किया गया, तो आगामी चुनावों में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। झारखंड के इस घटनाक्रम का असर सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय पर भी दिख रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले झारखंडी मूल के प्रवासी अपने गृह राज्य के विकास और वहां के युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले कई प्रवासी भारतीयों के परिजन आज भी राज्य में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं। उनके लिए राज्य में स्थिरता और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया निवेश और भविष्य की योजना बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोरेन सरकार की '60-40' नियोजन नीति को लेकर भी छात्रों में असंतोष है। छात्रों का एक बड़ा वर्ग राज्य की नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 100 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे पर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है, लेकिन जमीन पर इसका असर सीमित दिख रहा है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, यह विरोध प्रदर्शन कांग्रेस के चुनावी समीकरणों को बिगाड़ सकता है, क्योंकि युवा मतदाता किसी भी दल की जीत या हार तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
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