राजनीति
जौनपुर: भारतीय मजदूर संघ ने 17 मांगों को लेकर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, संविदा कर्मियों और श्रमिकों के हक में उठाई आवाज
ICN24 Newsroom 17 अग॰ 2026, 08:37 pm
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने जौनपुर में 17 सूत्रीय मांगों को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा, जिसमें पुरानी पेंशन बहाली और संविदा कर्मियों के स्थायीकरण की मांग की गई है।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में सोमवार को श्रमिक अधिकारों की गूंज कलेक्ट्रेट परिसर में सुनाई दी। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के नेतृत्व में विभिन्न श्रमिक संगठनों और कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। दोपहर लगभग 12:30 बजे संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार से संबंधित 17 प्रमुख मांगों को सूचीबद्ध किया गया है। बीएमएस का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में मजदूर और कर्मचारी वर्ग महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी उपेक्षा की दोहरी मार झेल रहा है।
ज्ञापन में मुख्य रूप से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संविदा कर्मियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। संघ ने मांग की है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानदेय को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। इसके साथ ही, ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं के स्थायीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की पुरजोर वकालत की गई है। बीएमएस ने 'समान काम के लिए समान वेतन' के सिद्धांत को सख्ती से लागू करने की मांग की है, ताकि संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों का आर्थिक शोषण रोका जा सके।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत काम करने वाले कर्मचारियों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए संघ ने कहा कि केंद्र सरकार से बीमा और अन्य लाभों के लिए बजट आवंटित होने के बावजूद, धरातल पर कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों के साथ होने वाले कथित उत्पीड़न पर भी चिंता व्यक्त की गई है। बीएमएस के अनुसार, कई बार कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों और बुनियादी सुविधाओं के बिना काम करने पर मजबूर किया जाता है, जो उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
संगठित क्षेत्र के साथ-साथ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, जैसे पटरी-रेहड़ी दुकानदार, ई-रिक्शा चालक, स्ट्रीट वेंडर, दिहाड़ी मजदूर, नाई, धोबी और दर्जी के लिए भी सामाजिक सुरक्षा की मांग उठाई गई है। संघ का कहना है कि इन वर्गों को पुलिस और प्रशासनिक उत्पीड़न से राहत मिलनी चाहिए और उनके लिए मूलभूत नागरिक सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली का मुद्दा भी इस ज्ञापन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जो सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी मांग है।
शिक्षा क्षेत्र में मिड-डे मील बनाने वाले रसोइयों की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डालते हुए संघ ने उनका मानदेय बढ़ाकर कम से कम 10,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अतिरिक्त, ईपीएस-95 योजना के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन में वृद्धि और इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) से जोड़ने की मांग की गई है ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को महंगाई के दौर में राहत मिल सके। बीएमएस ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर जल्द ही सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करने के लिए मजबूर होंगे।
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