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पुणे मनपा का बड़ा फैसला: वार्ड समितियों में राजनीतिक 'सेटिंग' खत्म, अब सामाजिक कार्यकर्ताओं को मिलेगी जगह

ICN24 Newsroom 17 अग॰ 2026, 07:37 pm
पुणे मनपा का बड़ा फैसला: वार्ड समितियों में राजनीतिक 'सेटिंग' खत्म, अब सामाजिक कार्यकर्ताओं को मिलेगी जगह

पुणे नगर निगम ने वार्ड समितियों में पारदर्शिता लाने के लिए राजनीतिक कार्यकर्ताओं की जगह अब NGO और सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों को नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

पुणे नगर निगम (PMC) ने शहर के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़े बदलाव की घोषणा की है। नगर निगम की 15 वार्ड समितियों में अब राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बजाय सामाजिक संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के प्रतिनिधियों को मनोनीत किया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य स्थानीय प्रशासन में राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करना और नागरिक सुविधाओं के प्रबंधन में विशेषज्ञता और पारदर्शिता लाना है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन 15 वार्ड समितियों में कुल 45 सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। प्रत्येक समिति में तीन सदस्यों को स्थान मिलेगा। अब तक, इन पदों का उपयोग राजनीतिक दलों द्वारा अपने वफादार कार्यकर्ताओं को 'एडजस्ट' करने या राजनीतिक 'सेटिंग' के लिए किया जाता था। हालांकि, नए नियमों के तहत अब केवल वे लोग ही इन समितियों का हिस्सा बन पाएंगे, जो सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं और जिनके पास नागरिक मुद्दों की गहरी समझ है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस बदलाव से वार्ड स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता आएगी। राजनीतिक कार्यकर्ता अक्सर अपने दलों के एजेंडे को प्राथमिकता देते थे, जिससे वास्तविक जनसमस्याएं पीछे छूट जाती थीं। NGO प्रतिनिधियों के आने से शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण जैसे विषयों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। पुणे, जो महाराष्ट्र का एक प्रमुख शैक्षणिक और आईटी केंद्र है, वहां इस तरह के प्रशासनिक सुधारों की लंबे समय से मांग की जा रही थी। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में बसे पुणेकर और एनआरआई समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर अपने गृह नगर में बेहतर बुनियादी ढांचे और पेशेवर प्रशासन की उम्मीद करते हैं। स्थानीय शासन में पारदर्शिता बढ़ने से विदेशी निवेश और प्रवासियों द्वारा समर्थित सामाजिक परियोजनाओं को भी बल मिलने की संभावना है। नगर निगम के इस कदम को भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में भी देखा जा रहा है। वार्ड समितियों के पास स्थानीय बजट और विकास योजनाओं पर निगरानी रखने का अधिकार होता है। जब स्वतंत्र सामाजिक कार्यकर्ता इन समितियों में बैठेंगे, तो जवाबदेही तय करना आसान होगा। प्रशासन जल्द ही इसके लिए आवेदन प्रक्रिया और चयन मानदंड जारी करेगा, जिसमें अनुभव और ट्रैक रिकॉर्ड को प्राथमिकता दी जाएगी।
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