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तिरुवनंतपुरम: जेल में बंद भाजपा पार्षद की छुट्टी मंजूर होने पर विवाद, अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू

ICN24 Newsroom 2 अग॰ 2026, 03:36 pm
तिरुवनंतपुरम: जेल में बंद भाजपा पार्षद की छुट्टी मंजूर होने पर विवाद, अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू

तिरुवनंतपुरम में जेल में बंद भाजपा पार्षद को अवकाश दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। सरकार ने इस मामले में गृह और स्थानीय स्वशासन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में एक अभूतपूर्व प्रशासनिक विवाद सामने आया है, जहां जेल में बंद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक पार्षद को आधिकारिक तौर पर अवकाश (लीव) प्रदान किया गया है। इस घटनाक्रम ने केरल की राजनीति में भूचाल ला दिया है, जिसके बाद राज्य सरकार ने गृह विभाग और स्थानीय स्वशासन (LSG) विभाग के अधिकारियों की भूमिका की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। मामला भाजपा पार्षद वी.जी. गिरिकुमार से जुड़ा है, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। नियमों के अनुसार, किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि को निगम की बैठकों से अनुपस्थित रहने के लिए औपचारिक अनुमति की आवश्यकता होती है, लेकिन जेल में रहते हुए इस प्रक्रिया का पालन कैसे किया गया, यह अब जांच का विषय है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, पार्षद की ओर से अवकाश का आवेदन तब प्रस्तुत किया गया जब वह पहले से ही सलाखों के पीछे थे। सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एलडीएफ नेतृत्व का आरोप है कि जेल प्रशासन और निगम के कुछ अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी कर पार्षद की मदद की है। एलडीएफ ने घोषणा की है कि वे इस मामले में चुनाव आयोग (ईसी), स्थानीय स्वशासन मंत्री और निगम सचिव के पास औपचारिक शिकायत दर्ज करेंगे। उनका तर्क है कि यह न केवल प्रक्रियात्मक चूक है, बल्कि सत्ता का दुरुपयोग भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। भारतीय कानूनों के तहत, जेल में बंद व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित किसी भी दस्तावेज को जेल अधिकारियों द्वारा प्रमाणित किया जाना अनिवार्य है। जांच का मुख्य केंद्र यह होगा कि क्या जेल अधिकारियों ने इस आवेदन को प्रमाणित किया था और क्या निगम के अधिकारियों ने आवेदन की वैधता की जांच किए बिना ही उसे मंजूरी दे दी। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर भारत में प्रशासनिक जवाबदेही और शासन प्रणाली की जटिलताओं को दर्शाती है। प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में नगर निकाय चुनावों और स्थानीय शासन की गतिविधियों में गहरी रुचि रखते हैं, क्योंकि इन फैसलों का सीधा असर उनके पैतृक क्षेत्रों के विकास पर पड़ता है। इस तरह के विवाद विदेशी धरती पर भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि को प्रभावित करते हैं। फिलहाल, स्थानीय स्वशासन विभाग ने फाइलों को जब्त कर लिया है और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। यदि जांच में मिलीभगत की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन सहित सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। भाजपा ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मुद्दा आगामी नगर निकाय सत्रों में गरमा सकता है।
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