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पोंटा साहिब: शहीद लोबगा रांगज़ेन को श्रद्धांजलि, चीन के 'जातीय एकता कानून' के खिलाफ फूटा गुस्सा

ICN24 Newsroom 3 अग॰ 2026, 05:37 pm
पोंटा साहिब: शहीद लोबगा रांगज़ेन को श्रद्धांजलि, चीन के 'जातीय एकता कानून' के खिलाफ फूटा गुस्सा

हिमाचल प्रदेश के पोंटा साहिब में तिब्बती समुदाय ने शहीद लोबगा रांगज़ेन को याद करते हुए चीन के विवादित 'जातीय एकता कानून' के विरोध में एक विशाल रैली निकाली।

हिमाचल प्रदेश के पोंटा साहिब में हाल ही में एक विशाल विरोध प्रदर्शन और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें तिब्बती समुदाय के साथ-साथ स्थानीय निवासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह रैली शहीद लोबगा रांगज़ेन की शहादत को नमन करने और चीन द्वारा तिब्बत में लागू किए गए विवादास्पद 'जातीय एकता कानून' (Ethnic Unity Law) के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए आयोजित की गई थी। प्रदर्शनकारियों ने बीजिंग की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की। शहीद लोबगा रांगज़ेन को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनका बलिदान तिब्बती स्वतंत्रता संघर्ष और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। पोंटा साहिब, जो कि भारत में तिब्बती शरणार्थियों के प्रमुख केंद्रों में से एक है, वहां इस तरह की एकजुटता का प्रदर्शन चीन की उन नीतियों को सीधी चुनौती माना जा रहा है, जो तिब्बती पहचान को मिटाने की कोशिश कर रही हैं। रैली में शामिल लोगों ने बैनर और पोस्टर थाम रखे थे, जिन पर चीन के 'सांस्कृतिक नरसंहार' को रोकने की अपील की गई थी। चीन का 'जातीय एकता कानून' इस समय दुनिया भर में आलोचना का केंद्र बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस कानून की आड़ में चीन तिब्बतियों की विशिष्ट सांस्कृतिक, धार्मिक और भाषाई पहचान को जबरन 'हानीकरण' (Sinicization) के जरिए खत्म करना चाहता है। यह कानून न केवल स्थानीय लोगों पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा थोपता है, बल्कि वहां की पारंपरिक जीवनशैली में भी दखल देता है। मानवाधिकार संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि इस तरह के कानून तिब्बत में असंतोष को और बढ़ा सकते हैं। आईसीएम24 (ICN24) के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला भारतीय और तिब्बती समुदाय भी इन भू-राजनीतिक गतिविधियों पर गहरी नजर रखता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले तिब्बती मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अक्सर कैनबरा स्थित चीनी दूतावास के सामने इस तरह के कानूनों का विरोध करते आए हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते सामरिक संबंधों के बीच, तिब्बत का मुद्दा दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो गया है। रैली के समापन पर एक ज्ञापन भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें चीन से तिब्बत में धार्मिक स्वतंत्रता बहाल करने और दमनकारी कानूनों को वापस लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक तिब्बत की स्वायत्तता और वहां के लोगों के अधिकारों का सम्मान नहीं किया जाता, तब तक उनका शांतिपूर्ण संघर्ष और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया है कि तिब्बती संघर्ष की लौ आज भी उतनी ही प्रज्वलित है, जितनी दशकों पहले थी।
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