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भारत-अफगानिस्तान की बढ़ती नजदीकियों से पाकिस्तान में खलबली, सेना ने दिया विवादित बयान
ICN24 Newsroom 3 अग॰ 2026, 03:37 pm

भारत और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते कूटनीतिक संबंधों और साझा विरासत के दावों ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है, जिस पर पाकिस्तानी सेना ने विवादित टिप्पणी की है।
दक्षिण एशिया के बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और अफगानिस्तान की बढ़ती नजदीकियों ने पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हाल ही में पाकिस्तानी सेना ने दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों पर कड़ी और विवादित प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत और अफगानिस्तान के बीच के कूटनीतिक विकास पर अपनी नाराजगी जाहिर की।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अफगानिस्तान की कार्यवाहक तालिबान सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने भारत का दौरा किया। इस दौरे के दौरान अफगान मंत्री ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों की सराहना की, बल्कि यह भी कहा कि भारत और अफगानिस्तान के लोगों का 'डीएनए' (DNA) एक ही है। इस बयान को दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों के प्रमाण के रूप में देखा गया, जिसने इस्लामाबाद में सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी।
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने इस 'साझा डीएनए' वाले बयान पर तंज कसते हुए धार्मिक संदर्भों का इस्तेमाल किया और अफगानिस्तान की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान की उस पुरानी चिंता से जोड़कर देख रहे हैं जिसमें उसे लगता है कि काबुल और नई दिल्ली की दोस्ती उसे क्षेत्रीय स्तर पर अलग-थलग कर सकती है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अफगानिस्तान में मानवीय सहायता और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसे वहां की जनता और वर्तमान प्रशासन दोनों ने सराहा है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले दक्षिण एशियाई प्रवासियों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता हमेशा चर्चा का विषय रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कड़ा रुख दरअसल उसकी अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं और अफगानिस्तान के साथ बिगड़ते संबंधों की हताशा का परिणाम है। डूरंड लाइन पर बढ़ता तनाव और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के मुद्दे पर काबुल के साथ पाकिस्तान का विवाद उसे भारत की ओर देखने के लिए मजबूर कर रहा है।
भारत ने हमेशा 'नेबरहुड फर्स्ट' की नीति के तहत अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को मानवीय और विकासपरक आधार पर आगे बढ़ाया है। नई दिल्ली का मानना है कि एक स्थिर और स्वतंत्र अफगानिस्तान पूरे क्षेत्र के हित में है। दूसरी ओर, पाकिस्तान की सेना द्वारा दिया गया यह विवादित बयान उसकी 'रणनीतिक गहराई' (Strategic Depth) की नीति के कमजोर होने का संकेत देता है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भारत और अफगानिस्तान की यह बढ़ती केमिस्ट्री पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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