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जबलपुर हाईकोर्ट की बड़ी कार्रवाई: आदेश की अवहेलना पर ACS समेत 3 अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी

ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 10:31 pm
जबलपुर हाईकोर्ट की बड़ी कार्रवाई: आदेश की अवहेलना पर ACS समेत 3 अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अदालत के आदेशों की अनदेखी करने पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सहित तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए वारंट जारी किया है।

जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य प्रशासन के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने अदालत के आदेशों की लगातार अवहेलना करने और सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहने के कारण अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सहित तीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं। न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका के आदेशों का सम्मान सर्वोपरि है और किसी भी स्तर का अधिकारी कानून से ऊपर नहीं है। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और अदालती निर्देशों के प्रति उदासीनता से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता द्वारा दायर एक मामले में उच्च न्यायालय ने पूर्व में स्पष्ट निर्देश जारी किए थे, जिनका पालन संबंधित विभाग द्वारा नहीं किया गया। बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद, जब अधिकारियों ने न तो आदेश का अनुपालन किया और न ही अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपनी स्थिति स्पष्ट की, तब न्यायालय को यह सख्त कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ा। अदालत ने जिन अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किए हैं, उनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ-साथ दो अन्य विभाग प्रमुख भी शामिल हैं। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों में यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है कि वे अदालती आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते, जिससे आम नागरिकों के न्यायिक अधिकारों का हनन होता है। इस कार्रवाई का उद्देश्य नौकरशाही को यह संदेश देना है कि प्रशासनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही तय है और वे अदालती प्रक्रिया को हल्के में नहीं ले सकते। भारत में न्यायिक जवाबदेही का यह मामला प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उन लोगों के लिए भी प्रासंगिक है जो भारत में सुशासन और कानूनी सुधारों पर नजर रखते हैं। भारत की कानूनी प्रणाली में अक्सर देरी और प्रशासनिक बाधाओं की आलोचना होती है, लेकिन उच्च न्यायालय का यह फैसला दर्शाता है कि न्यायपालिका कार्यपालिका की मनमानी को रोकने के लिए सक्षम और प्रतिबद्ध है। अदालत ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन वारंटों की तामील सुनिश्चित करें और संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई की तारीख पर अदालत में पेश करें। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां प्रशासन में पारदर्शिता लाने और 'रूल ऑफ लॉ' यानी कानून के शासन को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होती हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई के दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इन वरिष्ठ अधिकारियों के बचाव में क्या तर्क पेश करती है और क्या लंबित आदेशों का तुरंत पालन किया जाता है।
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