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जबलपुर: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में एबीवीपी का भारी प्रदर्शन, जर्जर छत और रुकी हुई छात्रवृत्ति पर कुलगुरु का घेराव

ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 04:37 pm
जबलपुर: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में एबीवीपी का भारी प्रदर्शन, जर्जर छत और रुकी हुई छात्रवृत्ति पर कुलगुरु का घेराव

जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में एबीवीपी ने तीन घंटे तक धरना दिया। छात्रों ने जर्जर भवन और छात्रवृत्ति में देरी को लेकर कुलगुरु से जवाब मांगा।

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDU) में मंगलवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छात्र संगठन ने मुख्य रूप से विधि (लॉ) विभाग की जर्जर हो चुकी छत और पिछले दो वर्षों से लंबित छात्रवृत्तियों के मुद्दे को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में तीन घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि कुलगुरु स्वयं आकर विभाग की जर्जर स्थिति का मुआयना करें। एबीवीपी के प्रांत मंत्री सुव्रत बांझल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र कुलगुरु कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय का लॉ विभाग अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। छत की हालत इतनी खराब है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिससे छात्रों की जान को खतरा बना हुआ है। छात्रों ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने मरम्मत कार्य को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। प्रशासनिक ढुलमुल रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए सुव्रत बांझल ने कहा कि पिछले दो वर्षों से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को उनकी देय छात्रवृत्ति नहीं मिली है। यह न केवल आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के साथ अन्याय है, बल्कि उनकी शिक्षा को जारी रखने में भी एक बड़ी बाधा है। बांझल ने यह भी रेखांकित किया कि परीक्षा परिणामों में लगातार हो रही देरी के कारण छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। परिणामों में देरी के कारण कई योग्य छात्र उच्च शिक्षा के लिए अन्य संस्थानों में समय पर प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं, जिससे उनका एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होने की कगार पर है। धरने के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। हालांकि, एबीवीपी ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी दिनों में बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं किया गया और छात्रवृत्ति का भुगतान सुनिश्चित नहीं हुआ, तो वे और भी उग्र आंदोलन करेंगे। यह घटना भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों के गिरते बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक शिथिलता की ओर इशारा करती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि भारत से आने वाले कई अंतरराष्ट्रीय छात्र इन्हीं पृष्ठभूमि से आते हैं। भारत में शैक्षिक सुधारों की धीमी गति अक्सर छात्रों को विदेशों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया की ओर रुख करने के लिए प्रेरित करती है, जहां बेहतर सुविधाएं और सुव्यवस्थित प्रशासनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।
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