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‘बेटी पैदा होने पर भी केंद्र को देते हैं दोष’: पंजाब विधानसभा में भाजपा विधायक अश्विनी शर्मा के बयान पर भारी हंगामा

ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 03:37 pm
‘बेटी पैदा होने पर भी केंद्र को देते हैं दोष’: पंजाब विधानसभा में भाजपा विधायक अश्विनी शर्मा के बयान पर भारी हंगामा

पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में भाजपा विधायक अश्विनी शर्मा की एक टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया, जिसमें उन्होंने व्यंग्य करते हुए बेटी के जन्म और केंद्र सरकार के विरोध को जोड़ा।

चंडीगढ़ में पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक अश्विनी शर्मा ने एक विवादित टिप्पणी कर दी। सदन में राज्य की वित्तीय स्थिति और केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड को लेकर बहस चल रही थी। इसी दौरान पठानकोट से विधायक अश्विनी शर्मा ने सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) पर तंज कसते हुए कहा, “आपके यहां तो आलम यह है कि अगर घर में बेटी पैदा हो जाए, तो आप उसके लिए भी केंद्र सरकार की गलती बता देते हो।” इस बयान के आते ही सदन में भारी हंगामा शुरू हो गया। आम आदमी पार्टी के विधायकों ने इस टिप्पणी को बेहद संवेदनशील और महिला विरोधी करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंची और सत्ता पक्ष के विधायकों ने शर्मा से तुरंत माफी की मांग की। आप विधायकों का कहना था कि एक तरफ देश और समाज बेटियों को बचाने और उन्हें सशक्त बनाने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सदन के भीतर इस तरह की उपमाओं का इस्तेमाल करना राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है। विवाद बढ़ता देख अश्विनी शर्मा ने बाद में अपनी सफाई पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान का मकसद बेटियों का अपमान करना नहीं था, बल्कि वह केवल यह दर्शाना चाहते थे कि पंजाब सरकार अपनी हर विफलता का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ने की आदी हो गई है। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में लिया गया है। हालांकि, विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक काफी देर तक जारी रही। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पंजाब सरकार और केंद्र के बीच फंड के वितरण, विशेष रूप से ग्रामीण विकास कोष (RDF) और नेशनल हेल्थ मिशन के पैसों को लेकर कानूनी और राजनीतिक खींचतान चल रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी कैबिनेट अक्सर केंद्र पर पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाती रही है। ऑस्ट्रेलिया में बसे पंजाबी समुदाय के लिए भी इस तरह की खबरें विशेष महत्व रखती हैं। प्रवासी भारतीय (NRIs) अक्सर अपनी मातृभूमि की राजनीतिक स्थिरता और वहां की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बारीकी से देखते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से जनता के बीच नेताओं की छवि प्रभावित होती है, खासकर उन मुद्दों पर जो सामाजिक मूल्यों और लैंगिक संवेदनशीलता से जुड़े हों। पंजाब विधानसभा के इस हंगामे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीतिक बहस के दौरान भाषाई मर्यादा और संवेदनशीलता को ताक पर रखना उचित है।
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