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ईरानी अखबार की 'रिवेंज लिस्ट' में ट्रंप और नेतन्याहू समेत कई बड़े नाम, वैश्विक तनाव बढ़ा
ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 04:31 pm

ईरान के एक कट्टरपंथी अखबार ने एक विवादास्पद इन्फोग्राफिक जारी किया है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू सहित कई नेताओं को निशाना बनाने की धमकी दी गई है।
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान से प्रकाशित होने वाले एक कट्टरपंथी विचारधारा के अखबार ने एक ऐसा इन्फोग्राफिक पब्लिश किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। इस इन्फोग्राफिक को 'रिवेंज लिस्ट' या प्रतिशोध की सूची बताया जा रहा है, जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और कई अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों के नाम और तस्वीरें शामिल हैं। यह प्रकाशन ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में संघर्ष की स्थिति पहले से ही नाजुक बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में इसे एक खुली धमकी के रूप में देखा जा रहा है।
अखबार द्वारा जारी इस सूची में न केवल राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं, बल्कि इसमें सैन्य अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस सूची का मुख्य आधार जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेना बताया जा रहा है। गौरतलब है कि सुलेमानी की मौत के बाद से ही ईरान लगातार 'कठोर प्रतिशोध' की बात करता रहा है। इस इन्फोग्राफिक में उन लोगों को चिह्नित किया गया है जिन्हें ईरान सुलेमानी की हत्या की साजिश में शामिल मानता है। जानकारों का कहना है कि इस तरह के प्रकाशन का उद्देश्य घरेलू स्तर पर कट्टरपंथी समर्थकों को लामबंद करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना है।
इस घटनाक्रम का सीधा असर वैश्विक भू-राजनीति पर पड़ने की संभावना है। अमेरिका और इजरायल ने पहले भी इस तरह की धमकियों को गंभीरता से लिया है और अपनी सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया है। वाशिंगटन और यरुशलम की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इससे कूटनीतिक बातचीत के रास्ते और भी कठिन हो सकते हैं। ईरान के भीतर इस तरह की बयानबाजी अक्सर तब बढ़ जाती है जब देश पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का दबाव बढ़ता है या घरेलू स्तर पर असंतोष को दबाने की आवश्यकता होती है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और व्यापक प्रवासी समाज के लिए यह खबर चिंता का विषय है। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों के ही मध्य पूर्व के साथ गहरे आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। खाड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, मध्य पूर्व में लाखों भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं, जिनकी सुरक्षा हमेशा एक प्राथमिकता रहती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी धमकियां क्षेत्रीय शांति को भंग कर सकती हैं, जिसका असर वैश्विक व्यापार मार्गों पर भी पड़ेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान की ओर से इस तरह के 'प्रोपेगेंडा' का इस्तेमाल नया नहीं है, लेकिन डिजिटल युग में इसके तेजी से फैलने के कारण यह अधिक खतरनाक हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात पर नजर बनाए हुए है कि क्या यह केवल प्रतीकात्मक विरोध है या ईरान वास्तव में किसी बड़े कदम की तैयारी कर रहा है। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की संघीय सरकार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर करीबी नजर रख रही हैं ताकि इस तनाव का असर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता पर न पड़े।
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