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इंस्टाग्राम पर शुरू हुई प्रेम कहानी को मिली कानूनी जीत, 1200 किमी की दूरी और पारिवारिक विरोध को मात देकर एक हुए राधिका-सागर

ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 02:11 am
इंस्टाग्राम पर शुरू हुई प्रेम कहानी को मिली कानूनी जीत, 1200 किमी की दूरी और पारिवारिक विरोध को मात देकर एक हुए राधिका-सागर

उत्तराखंड की राधिका और मध्य प्रदेश के सागर की अनोखी प्रेम कहानी ने कानूनी बाधाओं को पार कर अपनी मंजिल पा ली है। इंस्टाग्राम से शुरू हुआ यह सफर शादी के बंधन तक पहुंचा।

भारत में डिजिटल युग के प्रेम की एक और मिसाल सामने आई है, जहां सोशल मीडिया पर शुरू हुई एक बातचीत ने न केवल सात समंदर पार के देशों जैसी भौगोलिक दूरियों को मिटा दिया, बल्कि कानूनी जटिलताओं पर भी विजय प्राप्त की। उत्तराखंड की 19 वर्षीय राधिका और मध्य प्रदेश के बैतूल निवासी सागर की यह प्रेम कहानी इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। करीब 1200 किलोमीटर की दूरी और परिवारों के कड़े विरोध के बावजूद, इस जोड़े ने कानूनी रूप से अपने रिश्ते को मुकम्मल किया है। इस कहानी का आगाज़ पांच महीने पहले फोटो-शेयरिंग ऐप 'इंस्टाग्राम' पर हुआ था। राधिका और सागर के बीच शुरू हुई सामान्य बातचीत जल्द ही गहरे प्रेम में बदल गई। जब दोनों ने साथ रहने का फैसला किया, तो सागर राधिका से मिलने हरिद्वार पहुंचा। वहां से दोनों ने मध्य प्रदेश के बैतूल आने का फैसला किया और 11 मई को एक आर्य समाज मंदिर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह कर लिया। हालांकि, उनकी यह राह इतनी आसान नहीं थी, क्योंकि राधिका के परिवार ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। राधिका के घर से अचानक चले जाने के बाद उसके परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें दावा किया गया कि राधिका नाबालिग है और उसे बहला-फुसलाकर ले जाया गया है। उत्तराखंड पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए जोड़े को ट्रैक किया और उन्हें वापस ले आई। इसके बाद यह मामला पूरी तरह से कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया। पुलिस और प्रशासन का रुख भी शुरू में परिवार के पक्ष में दिखाई दिया, जिससे यह मामला कोर्ट की चौखट तक जा पहुंचा। अदालत में हुई सुनवाई इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। राधिका ने निडर होकर न्यायाधीश के सामने अपना पक्ष रखा और स्पष्ट किया कि वह अपनी मर्जी से सागर के साथ गई है। उसने अपनी शिक्षा से संबंधित दस्तावेज़ प्रस्तुत किए, जिससे यह सिद्ध हुआ कि उसकी आयु 19 वर्ष है और वह कानूनन बालिग है। भारतीय कानून के तहत एक बालिग नागरिक को अपना जीवनसाथी चुनने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। अदालत ने राधिका के हक में फैसला सुनाते हुए उसे सागर के साथ रहने की अनुमति दे दी। यह मामला भारत में तेजी से बदलती सामाजिक व्यवस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित करता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी ऐसी खबरें विशेष महत्व रखती हैं, क्योंकि प्रवासी भारतीय अक्सर पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों और आधुनिक व्यक्तिगत स्वायत्तता के बीच संतुलन की चुनौतियों को महसूस करते हैं। राधिका और सागर की जीत न केवल उनके प्रेम की जीत है, बल्कि यह उस संवैधानिक अधिकार की भी पुष्टि करती है जो भारत के युवाओं को अपनी पसंद से जीने की शक्ति देता है।
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