राजनीति
'वंदे मातरम' का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा हिंदुस्तान: पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे का तीखा हमला
ICN24 Newsroom 21 अग॰ 2026, 06:37 am

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के सम्मान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा और इसे राष्ट्र की अस्मिता से जोड़ा।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर हो रहे विवादों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदुस्तान अब अपने राष्ट्रीय प्रतीकों और विशेष रूप से 'वंदे मातरम' का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। उनके इस बयान को हाल के दिनों में विपक्षी खेमे के कुछ नेताओं द्वारा राष्ट्रीय गीत के प्रति दिखाई गई कथित उदासीनता के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
चौबे ने जोर देकर कहा कि 'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना और करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस गीत ने देश के क्रांतिकारियों में जोश भरा और जिसे गाते हुए अनगिनत वीरों ने शहादत दी, उसका निरादर करना सीधे तौर पर देश की अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देना है। उन्होंने राजनीतिक दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति के चलते देश के स्वाभिमान से समझौता करना आत्मघाती साबित होगा।
पूर्व मंत्री ने आगे कहा कि आज के समय में जब भारत वैश्विक स्तर पर अपनी एक नई पहचान बना रहा है, तब कुछ ताकतें देश के भीतर ही सांस्कृतिक और वैचारिक मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहें। चौबे का मानना है कि 'वंदे मातरम' का विरोध करना संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है और यह भारतीय संविधान की मूल भावना के भी प्रतिकूल है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय (प्रवासी भारतीयों) के लिए भी यह मुद्दा काफी संवेदनशील है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्वतंत्रता दिवस समारोहों में 'वंदे मातरम' की गूँज प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करती है। ऑस्ट्रेलिया में सक्रिय भारतीय संगठनों का मानना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना केवल भारत में रहने वालों का ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार बैठे हर भारतीय का कर्तव्य है। अश्विनी चौबे के इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा बटोरी है, जहाँ प्रवासी भारतीय समाज के लोग भी अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अश्विनी चौबे का यह बयान आगामी चुनावों और राष्ट्रवाद के मुद्दे को धार देने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। बीजेपी अक्सर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को अपने एजेंडे में प्रमुखता देती रही है। चौबे ने अंत में दोहराया कि जो लोग भारत की धरती पर रहकर भारत के गौरव गान से कतराते हैं, उन्हें जनता समय आने पर करारा जवाब देगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान सर्वोपरि है और इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक लाभ-हानि नहीं देखा जाना चाहिए।
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