राजनीति
रूस से रिकॉर्ड स्तर पर कच्चा तेल खरीद रहा भारत: वैश्विक तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा बनी प्राथमिकता
ICN24 Newsroom 14 जुल॰ 2026, 03:31 pm

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधाओं के बीच भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में नया रिकॉर्ड बनाया है।
नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए रूस से कच्चे तेल के आयात को एक नए उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद ने अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह रणनीतिक कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनातनी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार होता है। यदि इस मार्ग में कोई भी बाधा आती है, तो खाड़ी देशों से होने वाली तेल आपूर्ति ठप हो सकती है। ऐसे में भारत ने दूरदर्शिता दिखाते हुए रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत किया है, जो वर्तमान में भारत को रियायती दरों पर कच्चे तेल की आपूर्ति कर रहा है।
भारत के इस कदम का आर्थिक महत्व भी काफी अधिक है। रूस से सस्ता तेल मिलने के कारण भारत को अपने चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है। साथ ही, घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में भी यह आयात एक ढाल की तरह काम कर रहा है। हालांकि, पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और मूल्य सीमा (Price Cap) के बावजूद, भारत ने अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' को बरकरार रखा है और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। वैश्विक तेल कीमतों में उछाल का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों और मुद्रास्फीति पर पड़ता है। भारत की ओर से ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश वैश्विक बाजार में मांग-आपूर्ति के संतुलन को प्रभावित करती है। इसके अलावा, भारत की यह आर्थिक मजबूती क्वाड (QUAD) जैसे समूहों में उसके रणनीतिक प्रभाव को भी बढ़ाती है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया एक प्रमुख साझेदार है।
आने वाले महीनों में, यदि खाड़ी देशों में तनाव और बढ़ता है, तो भारत की रूस पर निर्भरता और बढ़ सकती है। भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट कर चुकी है कि उसकी पहली प्राथमिकता अपने नागरिकों को किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराना है। रूस से बढ़ता यह आयात इसी दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है, जो चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान कर रहा है।
संबंधित ख़बरें

राजनीति
नाशिक में खौफनाक वारदात: महिला से छेड़छाड़ का विरोध करने पर परिवार पर हमला, 15 किलोमीटर तक पीछा कर गाड़ी में की तोड़फोड़
नाशिक के भावली बांध के पास एक परिवार पर बदमाशों ने हमला किया और 15 किमी तक उनकी कार का पीछा किया। यह घटना महिला से छेड़छाड़ का विरोध करने पर हुई।
14 जुल॰ 2026, 05:31 pm

राजनीति
राहुल गांधी की स्वदेश वापसी: चुनावी राज्यों के लिए खरगे के साथ बनाएंगे विशेष रणनीति
20 दिनों के विदेश दौरे के बाद राहुल गांधी भारत लौट आए हैं, जहां वे अब खरगे के साथ मिलकर हरियाणा और जम्मू-कश्मीर चुनाव के लिए 'मास्टर प्लान' तैयार करेंगे।
14 जुल॰ 2026, 04:31 pm

राजनीति
छत्तीसगढ़ विधानसभा में सियासी घमासान: सरकार के खिलाफ आज विपक्ष पेश करेगा अविश्वास प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में आज भारी हंगामे के आसार हैं क्योंकि विपक्ष राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
14 जुल॰ 2026, 02:31 pm

