राजनीति
तुर्की-पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते पर भारत की 'पैनी नजर', विदेश मंत्रालय ने दी प्रतिक्रिया
ICN24 Newsroom 8 अग॰ 2026, 04:39 am

भारत सरकार ने तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए नए 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' पर कड़ी निगरानी रखने की पुष्टि की है।
भारत सरकार ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में संपन्न हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर अपनी औपचारिक प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को पुष्टि की कि नई दिल्ली इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर 'पैनी नजर' बनाए हुए है। इस समझौते को 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' का नाम दिया गया है, जो आने वाले समय में दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के रक्षा समीकरणों को बदल सकता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि भारत इस त्रिपक्षीय सहयोग की प्रकृति और इसके दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन कर रहा है। हालांकि भारत के सऊदी अरब के साथ संबंध पिछले एक दशक में रणनीतिक स्तर पर काफी मजबूत हुए हैं, लेकिन इस गठबंधन में पाकिस्तान और तुर्की की मौजूदगी भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता और विश्लेषण का विषय बनी हुई है। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि इस समझौते से क्षेत्र की सैन्य स्थिरता पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' का मुख्य उद्देश्य तीनों देशों के बीच रक्षा तकनीक का हस्तांतरण, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उपकरणों का साझा उत्पादन बताया जा रहा है। तुर्की, जो वर्तमान में ड्रोन तकनीक और उन्नत हथियारों के क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है, पाकिस्तान को रक्षा तकनीक प्रदान करने में विशेष रुचि दिखा रहा है। वहीं, सऊदी अरब की आर्थिक शक्ति इस त्रिपक्षीय गठबंधन को वित्तीय मजबूती प्रदान कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की चिंता मुख्य रूप से पाकिस्तान की रक्षा क्षमताओं में होने वाले किसी भी कृत्रिम विस्तार को लेकर है। भारत ने हमेशा यह रुख अपनाया है कि सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच किसी भी देश को पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को मजबूत करने से बचना चाहिए। हालांकि, सऊदी अरब के साथ भारत के गहरे आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा संबंध इस स्थिति को काफी जटिल बना देते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर रणनीतिक महत्व रखती है। क्वॉड (Quad) के सदस्य के रूप में ऑस्ट्रेलिया और भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में उभरते नए सैन्य गठबंधन वैश्विक सुरक्षा ढांचे को प्रभावित करते हैं, जिसका असर सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति और वहां रहने वाले प्रवासियों के हितों पर पड़ता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता ही उसे ऐसे जटिल अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों के बीच अपनी स्थिति मजबूत रखने में मदद करती है।
फिलहाल, नई दिल्ली ने इस मुद्दे पर बहुत ही नपी-तुली प्रतिक्रिया दी है। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके अपने द्विपक्षीय संबंध, विशेष रूप से सऊदी अरब के साथ, इस नए त्रिपक्षीय समझौते के कारण प्रभावित न हों। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत इस मुद्दे को कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से रियाद के सामने उठाता है या नहीं।
संबंधित ख़बरें

राजनीति
क्या मोदी सरकार और राहुल गांधी के बीच बढ़ेगी नजदीकियां? भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत
छात्र आंदोलनों और विपक्ष की बढ़ती ताकत के बीच क्या मोदी सरकार ने राहुल गांधी की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है? जानिए भारतीय राजनीति में इस संभावित बदलाव के मायने।
8 अग॰ 2026, 04:37 am

राजनीति
PoJK में कार्रवाई पर अमेरिका की नसीहत: संयम बरतने और मौलिक अधिकारों के सम्मान की अपील
अमेरिका ने PoJK में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर चिंता जताते हुए संयम बरतने की अपील की है, जबकि भारत ने 90 नागरिकों की मौत पर पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया है।
8 अग॰ 2026, 03:38 am

राजनीति
‘पूरी दाल ही काली है...’: E20 पेट्रोल के मुद्दे पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने E20 पेट्रोल नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इससे आम आदमी को क्या आर्थिक लाभ मिल रहा है।
8 अग॰ 2026, 03:37 am

