राजनीति
भारत और UNESCAP ने प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी बढ़ाने पर दिया जोर
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 02:41 am

भारत के राजदूत पुनीत अग्रवाल और UNESCAP के शोम्बी शार्प ने बैंकॉक में मुलाकात कर डिजिटल बुनियादी ढांचे और सतत विकास पर चर्चा की।
बैंकॉक — भारत और संयुक्त राष्ट्र के एशिया-प्रशांत आर्थिक और सामाजिक आयोग (UNESCAP) ने क्षेत्र में विकास की गति को तेज करने और प्रमुख क्षेत्रों में आपसी तालमेल बिठाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। थाईलैंड में भारत के राजदूत, पुनीत अग्रवाल ने हाल ही में बैंकॉक में UNESCAP के साझेदारी और समन्वय के उप कार्यकारी सचिव, शोम्बी शार्प से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय वार्ता का केंद्र बिंदु भारत की विकास प्राथमिकताओं को UNESCAP के क्षेत्रीय लक्ष्यों के साथ जोड़ना था।
बैठक के दौरान, राजदूत अग्रवाल ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI), आपदा प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन जैसे क्षेत्रों में भारत की बढ़ती क्षमताओं पर प्रकाश डाला। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में 'ग्लोबल साउथ' के एक अग्रणी स्वर के रूप में अपनी पहचान बनाई है, और UNESCAP के साथ यह जुड़ाव उसी नेतृत्व को और मजबूती प्रदान करता है। दोनों पक्षों ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे भारतीय नवाचार, विशेष रूप से फिनटेक और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, अन्य एशिया-प्रशांत देशों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह कूटनीतिक प्रगति विशेष महत्व रखती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक विकास के साझा विजन पर काम कर रहे हैं। UNESCAP के ढांचे के भीतर भारत की सक्रियता न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देती है, बल्कि उन व्यापारिक और तकनीकी गलियारों को भी सुदृढ़ करती है जो मेलबर्न से मुंबई और सिडनी से नई दिल्ली तक फैले हुए हैं। क्षेत्रीय सहयोग में वृद्धि का सीधा असर निवेश के प्रवाह और पेशेवर गतिशीलता पर पड़ता है, जो प्रवासी भारतीयों के हितों से सीधा जुड़ा है।
शोम्बी शार्प ने सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने की दिशा में भारत के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत और UNESCAP के बीच सहयोग से समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे हाशिए पर रहने वाले समुदायों को मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी। चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि 'ब्लू इकोनॉमी' और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भविष्य में संयुक्त पहल की काफी संभावनाएं हैं।
इस बैठक का निष्कर्ष एक साझा कार्ययोजना की आवश्यकता पर समाप्त हुआ, जो भविष्य में होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं और क्षेत्रीय सम्मेलनों के लिए आधार तैयार करेगी। भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत, UNESCAP के साथ यह साझेदारी दक्षिण-पूर्व एशिया और उससे आगे के देशों के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है। आने वाले महीनों में, दोनों संस्थाएं शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्रों में संयुक्त कार्यशालाओं और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की योजना बना रही हैं।
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