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भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी, व्यापार समझौता जल्द होगा पूरा: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो

ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 04:30 am
भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी, व्यापार समझौता जल्द होगा पूरा: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका का अनिवार्य सहयोगी बताते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता अंतिम चरण में है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के समक्ष गवाही देते हुए रुबियो ने भारत को अमेरिका का एक 'अपरिहार्य रणनीतिक सहयोगी' बताया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौता अब पूरा होने के करीब है। यह बयान प्रतिनिधि बिल हुइज़ेंगा द्वारा रुबियो की हालिया भारत यात्रा के परिणामों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में आया। रुबियो ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच संवाद का स्तर अब तक के उच्चतम स्तर पर है। उन्होंने कहा कि व्यापार वार्ता के जो मुद्दे पहले जटिल लग रहे थे, उन्हें अब सुलझा लिया गया है और अंतिम दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापारिक प्रगति केवल आर्थिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष मायने रखती है, क्योंकि क्वाड (QUAD) गठबंधन के माध्यम से भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के संबंध गहरे जुड़े हुए हैं। अमेरिका और भारत के बीच किसी भी बड़े व्यापार समझौते का सीधा सकारात्मक प्रभाव इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) और निवेश के माहौल पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रुबियो की यह टिप्पणी भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति को मान्यता देती है। भारत अब न केवल दक्षिण एशिया की एक क्षेत्रीय ताकत है, बल्कि वह वैश्विक लोकतंत्रों के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरा है। व्यापारिक मोर्चे पर, दोनों देश कृषि, रक्षा प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि इस समझौते से दोनों देशों के नागरिकों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और तकनीकी हस्तांतरण की प्रक्रिया सुगम होगी। भारतीय प्रवासियों और ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के व्यवसायियों के लिए यह विकास एक स्थिर और समृद्ध आर्थिक कॉरिडोर का संकेत देता है। आने वाले महीनों में इस समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।
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