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विरासत में मिला घर: वरदान या बोझ? ऑस्ट्रेलिया में संपत्ति उत्तराधिकार की छिपी चुनौतियां

ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 02:31 am
विरासत में मिला घर: वरदान या बोझ? ऑस्ट्रेलिया में संपत्ति उत्तराधिकार की छिपी चुनौतियां

ऑस्ट्रेलिया में पुश्तैनी घर विरासत में मिलना हमेशा फायदे का सौदा नहीं होता। भारी टैक्स, रखरखाव और भावनात्मक बोझ कई परिवारों के लिए इसे एक मुसीबत बना रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया में घर खरीदना एक बड़ा सपना माना जाता है, और जब किसी को विरासत में अपने माता-पिता का घर मिलता है, तो इसे आमतौर पर एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि के रूप में देखा जाता है। हालांकि, हालिया रिपोर्टों और वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यह 'उपहार' कई ऑस्ट्रेलियाई और विशेष रूप से भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के लिए एक जटिल चुनौती बनता जा रहा है। पुश्तैनी संपत्ति का मालिक बनना न केवल भारी कर (Tax) बोझ लेकर आता है, बल्कि इसके साथ जुड़े भावनात्मक और रखरखाव के खर्च कई बार उत्तराधिकारियों को कर्ज के जाल में फंसा देते हैं। ऑस्ट्रेलियाई कानून के तहत, यदि आप अपने माता-पिता का मुख्य निवास (Principal Place of Residence) विरासत में पाते हैं, तो आपको आमतौर पर तुरंत कोई टैक्स नहीं देना होता। लेकिन असली समस्या तब शुरू होती है जब आप इसे बेचने का फैसला करते हैं। यदि घर को माता-पिता की मृत्यु के दो साल के भीतर नहीं बेचा जाता है, तो कैपिटल गेन्स टैक्स (CGT) लागू हो सकता है। बढ़ती संपत्ति की कीमतों के साथ, यह टैक्स राशि लाखों डॉलर तक पहुंच सकती है। कई परिवारों के लिए, संपत्ति को जल्दी बेचना भावनात्मक रूप से कठिन होता है, लेकिन वित्तीय रूप से वे इसे लंबे समय तक रखने में सक्षम नहीं होते। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह स्थिति और भी पेचीदा हो सकती है। सांस्कृतिक रूप से, पुश्तैनी संपत्ति को बेचना अक्सर एक कठिन निर्णय माना जाता है। माता-पिता की यादों से जुड़े घर को बनाए रखने का दबाव बच्चों पर होता है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के महंगे प्रॉपर्टी मार्केट में, एक पुराने घर का रखरखाव, काउंसिल रेट्स, बीमा और मरम्मत का खर्च साल-दर-साल बढ़ता जाता है। कई मामलों में, भाई-बहनों के बीच संपत्ति के बंटवारे को लेकर होने वाले विवाद इस बोझ को और बढ़ा देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर घर के साथ आने वाले 'हिडन कॉस्ट' यानी छिपे हुए खर्चों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। एक पुराना घर, जिसे दशकों से अपडेट नहीं किया गया है, उसे आधुनिक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए हजारों डॉलर की आवश्यकता हो सकती है। यदि उत्तराधिकारी पहले से ही अपने स्वयं के होम लोन की किस्तें चुका रहे हैं, तो दूसरे घर का खर्च उठाना उन्हें वित्तीय संकट में डाल सकता है। अंततः, विशेषज्ञों की सलाह है कि संपत्ति उत्तराधिकार के मामले में भावनाओं के बजाय व्यावहारिक वित्तीय योजना को प्राथमिकता देनी चाहिए। वसीयत (Will) तैयार करते समय वित्तीय सलाहकारों और वकीलों से परामर्श करना अनिवार्य है ताकि अगली पीढ़ी को विरासत में खुशियां मिलें, न कि वित्तीय बोझ। भारतीय परिवारों को ऑस्ट्रेलिया के जटिल कर कानूनों को समझना चाहिए ताकि वे समय रहते सही निर्णय ले सकें और भविष्य की परेशानियों से बच सकें।
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