ऑस्ट्रेलिया
26 साल की उम्र और दो बार हार्ट अटैक: सबसे फिट होने के बावजूद इस युवती के साथ जो हुआ वह एक बड़ी चेतावनी है
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:07 am

26 वर्षीय चानिंग मुलर फिट थीं, एथलीट थीं और शाकाहारी भी, लेकिन फिर भी उन्हें दो बार दिल का दौरा पड़ा। यह मामला युवाओं में बढ़ते हृदय रोगों के प्रति एक गंभीर चेतावनी है।
हृदय रोगों को अक्सर बढ़ती उम्र और खराब जीवनशैली से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन चानिंग मुलर की कहानी इस धारणा को पूरी तरह से चुनौती देती है। जब चानिंग केवल 26 वर्ष की थीं, तब उन्होंने एक नहीं बल्कि दो बार हार्ट अटैक का सामना किया। यह उस समय की बात है जब वह अपने जीवन के सबसे फिट दौर में थीं। वह एक सक्रिय एथलीट थीं, पूरी तरह से शाकाहारी थीं और उनके परिवार में दिल की बीमारी का कोई पुराना इतिहास भी नहीं था। उनकी यह आपबीती आज के युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है, खासकर उन लोगों के लिए जो सोचते हैं कि अच्छी फिटनेस उन्हें हर बीमारी से सुरक्षित रखती है।
चानिंग बताती हैं कि जिस समय उन्हें पहला दिल का दौरा पड़ा, वह उस समय अपनी शारीरिक फिटनेस के चरम पर थीं। वह नियमित रूप से वर्कआउट करती थीं और अपने खान-पान का बहुत ख्याल रखती थीं। लेकिन अचानक एक दिन उन्हें सीने में दबाव और असामान्य बेचैनी महसूस हुई। उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि ये लक्षण किसी गंभीर हृदय संबंधी समस्या के हो सकते हैं। अस्पताल जाने के बाद पता चला कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। डॉक्टर भी यह जानकर हैरान थे कि इतनी कम उम्र और स्वस्थ जीवनशैली वाली युवती इस स्थिति में कैसे पहुंच गई।
अभी वह पहले झटके से उबर ही रही थीं कि कुछ समय बाद उन्हें दूसरा हार्ट अटैक भी आ गया। चानिंग के अनुसार, यह उनके लिए एक मानसिक और शारीरिक सदमा था। चिकित्सा जांच में बाद में पता चला कि उनकी धमनियों में कुछ ऐसी जटिलताएं थीं जिन्हें केवल बाहर से देखकर या सामान्य फिटनेस के आधार पर नहीं पहचाना जा सकता था। उनका मामला यह स्पष्ट करता है कि कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां केवल अधिक वजन या व्यायाम की कमी तक सीमित नहीं हैं; वे जेनेटिक्स, तनाव और शरीर के भीतर छिपे अन्य कारणों से भी हो सकती हैं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में चानिंग की कहानी विशेष महत्व रखती है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशियाई मूल के लोगों में हृदय रोगों का जोखिम अन्य समुदायों की तुलना में सांख्यिकीय रूप से अधिक होता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के युवाओं में अक्सर काम का तनाव और बदली हुई जीवनशैली हृदय स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिटनेस और स्वास्थ्य दो अलग चीजें हो सकती हैं। आप बाहर से फिट दिख सकते हैं, लेकिन आपके शरीर के आंतरिक अंग किस स्थिति में हैं, यह नियमित मेडिकल चेकअप से ही स्पष्ट हो सकता है।
चानिंग मुलर अब इस अनुभव के बाद लोगों को जागरूक करने का काम कर रही हैं। उनका संदेश स्पष्ट है: अपने शरीर की बात सुनें। यदि आपको सीने में हल्का दर्द, सांस फूलना या बेवजह की थकान महसूस होती है, तो उसे अपनी उम्र या फिटनेस का हवाला देकर नजरअंदाज न करें। समय पर की गई जांच और लक्षणों की पहचान ही जान बचा सकती है। हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है, और चानिंग की कहानी इसी कड़वी सच्चाई का प्रमाण है।
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