ऑस्ट्रेलिया
'मुझे घृणा हुई': सामान अधिक होने के कारण मोटल ने बेघर व्यक्ति को वापस लौटाया, ऑस्ट्रेलियाई आवास संकट की भयावह तस्वीर
ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 08:31 pm

ऑस्ट्रेलिया में आवास संकट के बीच एक मोटल द्वारा बेघर व्यक्ति को सामान अधिक होने के कारण कमरे से वंचित करने पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ा रोष व्यक्त किया है।
ऑस्ट्रेलिया में गहराते आवास संकट के बीच एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और व्यावसायिक नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक स्थानीय मोटल ने एक बेघर व्यक्ति को केवल इसलिए शरण देने से मना कर दिया क्योंकि उसके पास 'बहुत अधिक' सामान था। इस घटना के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और सामुदायिक संस्थाओं में भारी रोष व्याप्त है। एक प्रमुख एडवोकेट (पैरोकार) ने इस व्यवहार को 'घृणास्पद' बताते हुए मोटल प्रबंधन की कड़ी आलोचना की है।
घटना उस समय शुरू हुई जब एक बेघर व्यक्ति, जिसके पास रहने के लिए कोई स्थायी ठिकाना नहीं था, संकटकालीन आवास (Crisis Accommodation) के तहत मोटल पहुँचा। उसके पास मौजूद सामान में उसके जीवन भर की जमा-पूंजी और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं थीं। हालांकि, मोटल प्रबंधन ने उसे यह कहते हुए प्रवेश देने से इनकार कर दिया कि वह अपने साथ बहुत अधिक सामान लेकर आया है। एडवोकेट के अनुसार, यह व्यक्ति पहले से ही मानसिक और शारीरिक रूप से थका हुआ था और उसे छत की सख्त जरूरत थी।
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के निवासियों और नए प्रवासियों के लिए भी यह खबर चिंता का विषय है। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के बड़े शहरों जैसे सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन में किराये की दरों में भारी उछाल आया है, जिसके कारण निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए सिर छिपाने की जगह ढूंढना चुनौतीपूर्ण हो गया है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय में भी कई अंतरराष्ट्रीय छात्र और नए आए लोग आवास की कमी के कारण संकट का सामना कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि संकट के समय में भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान लचीलापन दिखाने के बजाय कठोर नीतियों का सहारा ले रहे हैं।
एडवोकेट ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं इस व्यवहार को देखकर दंग रह गया। एक व्यक्ति जिसके पास पहले से कुछ नहीं है, उसे उसके बचे-कुचे सामान के आधार पर न्याय करना और उसे बाहर निकालना अमानवीय है। हमें यह समझना होगा कि जब कोई बेघर होता है, तो उसका सारा जीवन कुछ बैगों में सिमट जाता है। उसे उन चीजों को फेंकने के लिए कहना उसके अस्तित्व को नकारने जैसा है।"
मोटल प्रबंधन ने अपनी सफाई में सुरक्षा और स्थान की कमी का हवाला दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भेदभाव की श्रेणी में आता है। ऑस्ट्रेलिया में बेघर लोगों की संख्या बढ़ रही है और 'कास्ट ऑफ लिविंग' (जीवन यापन की लागत) संकट ने स्थिति को और खराब कर दिया है। कई बार सामाजिक संस्थाएं वाउचर प्रदान करती हैं, लेकिन निजी मोटल और होटल अक्सर बेघर लोगों को ठहरने देने में आनाकानी करते हैं।
इस घटना ने नीति निर्माताओं का ध्यान एक बार फिर बेघर लोगों के अधिकारों की ओर खींचा है। सामुदायिक संगठनों ने मांग की है कि संकटकालीन आवास प्रदाताओं के लिए सख्त दिशानिर्देश बनाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति को इस तरह के अपमानजनक अनुभव से न गुजरना पड़े। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर एक चेतावनी की तरह है कि देश में आवास की उपलब्धता एक बड़ी सामाजिक चुनौती बनती जा रही है, जिसके लिए सामुदायिक एकजुटता और सरकारी हस्तक्षेप दोनों की आवश्यकता है।
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