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ग्रामीण स्वास्थ्य पर संकट: यूपी-महाराष्ट्र को मिला भारी फंड, फिर भी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी

ICN24 Newsroom 8 अग॰ 2026, 11:37 pm
ग्रामीण स्वास्थ्य पर संकट: यूपी-महाराष्ट्र को मिला भारी फंड, फिर भी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र को करोड़ों का फंड मिलने के बावजूद ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के हजारों पद खाली पड़े हैं।

भारत के ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे में एक गंभीर विरोधाभास सामने आया है। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को भारी-भरकम वित्तीय सहायता दी गई है, लेकिन इसके बावजूद इन राज्यों के ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों, विशेषकर विशेषज्ञों की भारी कमी बनी हुई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश को 5,686 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र को 2,497 करोड़ रुपये का हेल्थ फंड आवंटित किया गया है, फिर भी ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। आंकड़े बताते हैं कि देश भर के ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में विशेषज्ञों के कुल 8,923 पद खाली हैं। यह स्थिति तब है जब स्वास्थ्य बजट में लगातार वृद्धि की बात कही जा रही है। विशेष रूप से सर्जन, प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Gynecologists), फिजिशियन और बाल रोग विशेषज्ञों की कमी के कारण ग्रामीण आबादी को इलाज के लिए शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में फंड की उपलब्धता के बावजूद बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन के बीच का अंतर कम नहीं हो रहा है। महाराष्ट्र की स्थिति भी अलग नहीं है। करीब 2,497 करोड़ रुपये का फंड प्राप्त करने के बाद भी राज्य के दूरदराज के इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता एक बड़ी समस्या बनी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फंड जारी कर देना ही समाधान नहीं है; डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु नीतिगत बदलाव और बेहतर कार्य वातावरण की आवश्यकता है। अक्सर देखा गया है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण डॉक्टर ग्रामीण पोस्टिंग से कतराते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से चिंताजनक है। प्रवासी भारतीयों (NRIs) का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से ताल्लुक रखता है, जिनके बुजुर्ग माता-पिता और परिवार आज भी इन राज्यों के ग्रामीण या अर्ध-शहरी इलाकों में रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया के सुव्यवस्थित स्वास्थ्य ढांचे की तुलना में भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञों की यह कमी एनआरआई समुदाय के बीच अपने परिजनों के स्वास्थ्य को लेकर असुरक्षा की भावना पैदा करती है। इसके अलावा, विशेषज्ञों की यह कमी 'ब्रेन ड्रेन' की समस्या को भी रेखांकित करती है। भारत के कई बेहतरीन डॉक्टर बेहतर अवसरों की तलाश में ऑस्ट्रेलिया, यूके और अमेरिका जैसे देशों का रुख करते हैं। जहां एक ओर भारतीय डॉक्टर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं, वहीं उनके अपने देश के ग्रामीण अंचल विशेषज्ञ देखभाल के लिए तरस रहे हैं। सरकार को अब वित्तीय आवंटन के साथ-साथ डॉक्टरों की रिटेंशन पॉलिसी और ग्रामीण अस्पतालों में आधुनिक सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पैसा केवल कागजों पर नहीं, बल्कि लोगों के जीवन को बचाने में खर्च हो।
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