राजनीति
महाराष्ट्र विधानसभा में गूंजा हुजूर साहिब एक्ट विवाद; कांग्रेस विधायक ने सरकार के रुख पर उठाए सवाल
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 07:41 am
नांदेड़ स्थित हुजूर साहिब गुरुद्वारा अधिनियम में संशोधन के मुद्दे पर महाराष्ट्र विधानसभा में तीखी बहस हुई। कांग्रेस विधायक असलम शेख ने सरकार से इस विवादित कदम को पूरी तरह वापस लेने की मांग की है।
महाराष्ट्र की राजनीति में 'नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हुजूर अबचलनगर साहिब अधिनियम, 1956' को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। शनिवार, 29 जून को राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक असलम शेख ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा इस ऐतिहासिक कानून को बदलने या इसके प्रावधानों को कमजोर करने के किसी भी संभावित प्रयास को चुनौती दी। यह मामला उस समय फिर से चर्चा में आया जब विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
असलम शेख ने सदन में बोलते हुए कहा कि नांदेड़ स्थित तख्त श्री हुजूर साहिब न केवल सिखों के पांच पवित्र तख्तों में से एक है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है। उन्होंने तर्क दिया कि 1956 के अधिनियम में किसी भी प्रकार का बदलाव गुरुद्वारा बोर्ड की स्वायत्तता में सरकारी हस्तक्षेप माना जाएगा। विधायक ने मांग की कि सरकार इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करे और समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए किसी भी नए कानून के विचार को त्याग दे।
विवाद की जड़ महाराष्ट्र सरकार का वह हालिया प्रस्ताव है, जिसमें 1956 के कानून को निरस्त कर एक नया अधिनियम लाने की बात कही गई थी। प्रस्तावित बदलावों के तहत गुरुद्वारा बोर्ड में सरकारी मनोनीत सदस्यों की संख्या बढ़ाने और निर्वाचित प्रतिनिधियों की शक्ति कम करने का प्रावधान था। सिख समुदाय और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने इसका पुरजोर विरोध किया था। कड़े विरोध के बाद सरकार ने अस्थायी रूप से इस फैसले को निलंबित कर दिया था, लेकिन विपक्ष अब इसे पूरी तरह समाप्त करने की मांग कर रहा है।
इस मुद्दे का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में बसे विशाल भारतीय और विशेष रूप से सिख समुदाय के बीच भी इस घटनाक्रम को लेकर गहरी चिंता देखी गई है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय, जो नियमित रूप से नांदेड़ की तीर्थयात्रा करते हैं, इस प्रशासनिक फेरबदल को धार्मिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई सिख समुदाय के प्रतिनिधियों ने सोशल मीडिया और सामुदायिक मंचों के माध्यम से मांग की है कि तख्त की परंपराओं और प्रशासनिक ढांचे को पूर्ववत रखा जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा और भी तूल पकड़ सकता है। महा विकास अघाड़ी (MVA) के घटक दल इस मुद्दे को अल्पसंख्यकों और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़कर सत्तापक्ष को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। फिलहाल, सरकार ने इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विधानसभा में इस गूंज ने स्पष्ट कर दिया है कि हुजूर साहिब का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में एक संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर है।
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