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कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दी चेतावनी: समाज के कल्याण के लिए पत्रकारिता में नैतिकता और मूल्यों की बहाली जरूरी

ICN24 Newsroom 2 जुल॰ 2026, 10:31 am
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दी चेतावनी: समाज के कल्याण के लिए पत्रकारिता में नैतिकता और मूल्यों की बहाली जरूरी

बेंगलुरु में प्रेस दिवस समारोह के दौरान डीके शिवकुमार ने 'फेक न्यूज' के खतरों पर चिंता जताई और पत्रकारों से सत्यनिष्ठा बनाए रखने का आग्रह किया।

बेंगलुरु में आयोजित 'प्रेस दिवस' समारोह के दौरान कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मीडिया जगत को संबोधित करते हुए पत्रकारिता के गिरते स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की यह जिम्मेदारी है कि वह समाज के हित को सर्वोपरि रखे। शिवकुमार ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में 'फेक न्यूज' या भ्रामक खबरें न केवल सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ रही हैं, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक नींव को भी कमजोर कर रही हैं। उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बदलाव लाने और जनता को जागरूक करने का एक शक्तिशाली औजार है। उन्होंने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे सनसनीखेज खबरों के पीछे भागने के बजाय तथ्यों की सटीकता पर ध्यान दें। शिवकुमार के अनुसार, जब पत्रकार अपने नैतिक मूल्यों से समझौता करते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव आम नागरिक के विश्वास पर पड़ता है। उन्होंने पत्रकारों को याद दिलाया कि उनकी कलम में समाज को दिशा देने की शक्ति है और इस शक्ति का उपयोग बेहद जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में यह विषय और भी प्रासंगिक हो जाता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीय (NRIs) अपनी मातृभूमि से जुड़ी खबरों के लिए मुख्य रूप से डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर रहते हैं। अक्सर वाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया चैनलों पर प्रसारित होने वाली गलत सूचनाएं विदेशों में रह रहे भारतीयों के बीच अनावश्यक भ्रम और चिंता पैदा करती हैं। डीके शिवकुमार का यह संदेश कि मीडिया को 'सत्य' की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए, सीधे तौर पर उन प्रवासी भारतीयों को प्रभावित करता है जो भारत के घटनाक्रमों को करीब से देखते हैं। समारोह के दौरान शिवकुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार रचनात्मक आलोचना का स्वागत करती है, लेकिन व्यक्तिगत हितों के लिए खबरों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना पत्रकारिता के धर्म के खिलाफ है। उन्होंने सुझाव दिया कि मीडिया घरानों को अपने संवाददाताओं के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने चाहिए ताकि वे बदलती तकनीक के साथ-साथ नैतिक रिपोर्टिंग के महत्व को भी समझ सकें। अंत में, उन्होंने उन पत्रकारों की सराहना की जो विपरीत परिस्थितियों में भी निष्पक्षता के साथ अपना काम कर रहे हैं, और उम्मीद जताई कि आने वाले समय में कर्नाटक और देश की पत्रकारिता नए मानक स्थापित करेगी।
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