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H-1B वीजा आवेदन विवाद: अमेरिकी राजनयिक का दावा, भारत से आने वाले 80-90% आवेदनों में खामियां
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 11:00 am

एक अमेरिकी राजनयिक ने दावा किया है कि भारत से आने वाले H-1B वीजा आवेदनों में से 80-90% में फर्जी दस्तावेज या अयोग्य उम्मीदवार होते हैं। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है।
अमेरिका के H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। एक अमेरिकी राजनयिक के हालिया बयानों ने भारतीय टेक पेशेवरों और आव्रजन विशेषज्ञों के बीच खलबली मचा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, राजनयिक ने दावा किया है कि भारत से आने वाले H-1B वीजा आवेदनों में से लगभग 80 से 90 प्रतिशत में या तो फर्जी दस्तावेज संलग्न होते हैं या फिर आवेदक उस पद के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता पूरी नहीं करते हैं।
यह खुलासा एक टीवी चर्चा के दौरान हुआ, जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया। राजनयिक का तर्क है कि कई भारतीय कंपनियां और परामर्शदाता (consultancies) वीजा प्रणाली का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस बयान ने न केवल H-1B वीजा प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि एल-1 (L-1) वीजा के उपयोग को लेकर भी चिंता जताई है। आरोप लगाया गया है कि एल-1 वीजा का उपयोग H-1B के कड़े नियमों से बचने के लिए एक 'पिछले दरवाजे' (backdoor) के रूप में किया जा रहा है।
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और चुनावी माहौल में इस तरह के आंकड़ों का आना भारतीय आईटी उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि इन दावों को गंभीरता से लिया गया, तो भविष्य में वीजा जांच की प्रक्रिया और अधिक सख्त हो सकती है। इससे उन वास्तविक और योग्य पेशेवरों के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं जो कानूनी रूप से अमेरिका में काम करने का सपना देखते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर प्रासंगिक है। हालांकि यह मामला अमेरिका से जुड़ा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर स्किल्ड माइग्रेशन (skilled migration) को लेकर विकसित देशों का नजरिया बदल रहा है। ऑस्ट्रेलिया भी हाल के वर्षों में अपनी वीजा प्रणालियों की समीक्षा कर रहा है ताकि केवल उच्च कुशल श्रमिकों को ही प्रवेश मिले। यदि अमेरिका जैसे बड़े देश में भारतीय आवेदनों की साख पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर अन्य पश्चिमी देशों की आव्रजन नीतियों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल, भारत सरकार या प्रमुख आईटी संगठनों की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, पूर्व में भी अमेरिकी प्रशासन ने 'वीजा लॉटरी' प्रणाली में धोखाधड़ी रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या ये नए आंकड़े अमेरिका की आगामी आव्रजन नीति में किसी बड़े बदलाव का आधार बनते हैं।
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