राजनीति
भारतीय आमों के निर्यात पर संकट: जापान ने लगाई रोक, नेपाल ने भी कड़े किए नियम
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 06:52 am

भारतीय आमों की मिठास पर कीटनाशकों और खराब गुणवत्ता का साया पड़ा है। जापान द्वारा आयात पर रोक और नेपाल द्वारा सख्त मानकों ने कृषि निर्यात पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय आम, जिसे दुनिया भर में 'फलों का राजा' माना जाता है, वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। हाल ही में जापान ने भारतीय आमों के आयात को निलंबित कर दिया है, जबकि पड़ोसी देश नेपाल ने गुणवत्ता और सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए आयात के नियमों को काफी कड़ा कर दिया है। यह स्थिति न केवल भारतीय किसानों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की कृषि साख पर भी प्रभाव डाल रही है।
जापान द्वारा लिया गया यह निर्णय मुख्य रूप से मानकों के उल्लंघन के कारण है। जापानी अधिकारियों ने भारतीय आमों में कीटनाशकों के अवशेषों (pesticide residues) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई है। इसके अतिरिक्त, फलों की मक्खी (fruit fly) के संक्रमण को रोकने के लिए आवश्यक 'वेपर हीट ट्रीटमेंट' (VHT) प्रक्रियाओं में खामियां पाई गई हैं। जापान के सख्त खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत, मानकों पर थोड़ा भी समझौता आयात पर पूर्ण प्रतिबंध का कारण बन सकता है।
वहीं दूसरी ओर, नेपाल ने भी भारत से आने वाले फलों और सब्जियों पर कड़े परीक्षण लागू कर दिए हैं। नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि भारत से आने वाले आमों में अत्यधिक कीटनाशकों का उपयोग किया जा रहा है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इन नई पाबंदियों के कारण सीमा पर ट्रकों की लंबी कतारें लग गई हैं और निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय आमों (जैसे अल्फांसो और केसर) की भारी मांग रहती है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के कृषि, मत्स्य पालन और वानिकी विभाग (DAFF) के पास दुनिया के सबसे सख्त बायोसिक्योरिटी नियम हैं। भारत से ऑस्ट्रेलिया को होने वाले निर्यात में पहले ही सख्त उपचार प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। जापान और नेपाल की हालिया कार्रवाई यह संकेत देती है कि भारतीय निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर अपनी साख बचाए रखने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण में सुधार करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का मुख्य कारण भारत में खेती के दौरान कीटनाशकों का अनियंत्रित उपयोग और निर्यात से पहले उचित छंटाई व उपचार की कमी है। यदि भारत को अपनी वैश्विक स्थिति बनाए रखनी है, तो सरकार और निर्यातकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों का शत-प्रतिशत पालन हो। फिलहाल, यह स्थिति भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक चेतावनी की तरह है, जो बुनियादी ढांचे और परीक्षण सुविधाओं में सुधार की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है।
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